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Showing posts from April, 2025

प्रेमचंद की कहानियों में निहित राष्ट्रीय चेतना

प्रेमचंद की कहानियों में निहित राष्ट्रीय चेतना पर प्रकाश डालिए। ​ प्रस्तावना (Introduction) ​हिन्दी साहित्य के क्षितिज पर 'कथा सम्राट' (Emperor of Stories) और 'उपन्यास सम्राट' के रूप में देदीप्यमान मुंशी प्रेमचंद केवल एक साहित्यकार नहीं थे, बल्कि वे भारतीय स्वाधीनता संग्राम (Indian Freedom Struggle) के एक मूक सिपाही और युगद्रष्टा थे। साहित्य को "जीवन की आलोचना" (Criticism of Life) मानने वाले प्रेमचंद ने अपनी कलम को ही अपना हथियार बनाया। जब हम उनकी कहानियों का समग्र मूल्यांकन करते हैं, तो उनमें राष्ट्रीय चेतना (National Consciousness) का स्वर सबसे अधिक मुखर, व्यापक और प्रखर दिखाई देता है। ​प्रेमचंद का युग (1880-1936) भारतीय इतिहास में एक भयंकर राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक उथल-पुथल का काल था। यह वह समय था जब भारत ब्रिटिश साम्राज्यवाद (British Imperialism) की बेड़ियों में जकड़ा हुआ था। ऐसे में प्रेमचंद की कहानियाँ केवल मनोरंजन का साधन नहीं रहीं, बल्कि वे जनता में देशभक्ति (Patriotism) और सांस्कृतिक जागरण (Cultural Awakening) का शंखनाद बन गईं। इस विस्तृत आलेख म...

मुंशी प्रेमचंद के साहित्य में दलित जीवन संबंधी विचार: एक आलोचनात्मक विश्लेषण

मुंशी प्रेमचंद के साहित्य में दलित जीवन संबंधी विचार: एक आलोचनात्मक विश्लेषण ​ प्रस्तावना (Introduction) ​हिन्दी साहित्य के 'उपन्यास सम्राट' (Emperor of Novels) मुंशी प्रेमचंद केवल एक कथाकार नहीं थे, बल्कि वे अपने युग के सबसे महान समाजशास्त्री (Sociologist) , युगद्रष्टा और मानवीय संवेदनाओं के चितेरे थे। साहित्य को "जीवन की आलोचना" (Criticism of Life) मानने वाले प्रेमचंद ने अपने लेखन के माध्यम से भारतीय समाज की उन गहरी खाइयों को उजागर किया, जिन्हें सदियों से धर्म और परंपरा के नाम पर ढंका गया था। जब हम प्रेमचंद के साहित्य का समग्र मूल्यांकन करते हैं, तो उसमें समाज के सबसे निचले, शोषित और हाशिए पर खड़े वर्ग—अर्थात 'दलित समाज'—का चित्रण अत्यंत महत्वपूर्ण और प्रासंगिक हो जाता है। ​प्रेमचंद के दलित जीवन संबंधी विचारों का अध्ययन करते समय यह समझना आवश्यक है कि उनका दृष्टिकोण जड़ या स्थिर नहीं था, बल्कि वह समय और समाज के विकास के साथ निरंतर परिपक्व होता गया। उन्होंने अपने साहित्य की शुरुआत "आदर्शोन्मुखी यथार्थवाद" (Idealistic Realism) से की थी, जहाँ हृदय परि...

Real Numbers Online Quiz

Real Numbers Online Quiz Hello Students  Here we are providing online quiz on real numbers. There are 10 questions in the quiz which are subjected to the following topics  Fundamental theorem apartments  LCM and HCF  Relationship between LCM and HCF  Application of fundamental theorem of arithmetics  Rational numbers and irrational numbers  Decimal expansions of rational and irrational numbers  Operations on rational and irrational numbers. Loading…

Class 8 Maths Chapter 3 Quadrilaterals Online Test

 Class 8 Maths Chapter 3 Quadrilaterals Online Test Instructions:-  सबसे पहले Click Here पर टच करें उसके बाद NEXT  पर टच करें अपना नाम भरें अपना रोल नंबर भरें सभी प्रश्नों को ध्यानपूर्वक पढ़ें जो ऑप्शन सही है उसे पर क्लिक करें  जब आप सारे प्रश्न हल कर लें तो उसके बाद सबमिट (Submit)  बटन पर क्लिक करें  Click Here  

लड़की जिसकी मैंने हत्या की कहानी का सारांश

 लड़की जिसकी मैंने हत्या की कहानी का सारांश  लड़की जिसकी मैं हत्या की कहानी सुप्रसिद्ध कन्नड़ कथाकार आनंद जी की यह कहानी है, जो भारतीय समाज को विवेकशील और सहृदयता से देखने की एक प्रभावशाली कोशिश है। यह कहानी फ्लैशबैक शैली में लिखी गई है इस कहानी का नैरेटर स्वयं लेखक है.  शिला शिल्पों में नेरेटर की गहरी दिलचस्पी है, उन्हीं का अध्ययन करने के लिए वह सन 1931 में मैसूर की यात्रा करने के लिए जाते हैं। घूमते - घूमते नागवल्ली नाम के गांव में पहुंचते हैं। वहां वह गांव के प्रभावशाली व्यक्ति श्री करियप्पा के यहां ठहरते हैं। करिअप्पा बड़े ही अच्छे मन से उनका स्वागत करते हैं जिसका बखान खुद लेखक अपने शब्दों में करते है। लेखक सादगी वाला व्यक्ति है वह अपनी पत्नी से इतना प्यार करते हैं कि वह अपनी यात्रा का पूरा विवरण अपनी पत्नी लक्ष्मी को पत्र के माध्यम से भेजते हैं। यह कहानी उसे समय की है जब यात्राएं बैलगाड़ी से की जाती थी और आज की तरह ईमेल एसएमएस या फोन और मोबाइल की सुविधा नहीं थी. उस समय कबूतर, तोता और चिड़िया  ही संदेश लाने ले जाने का काम करते थे. लेखक अपनी पत्नी को पत्र ल...

IGNOU MHD 12 भारतीय कहानी दीदी Bharteey Kahani Didi

इस ब्लॉग में हम इग्नू एम ए हिंदी की द्वितीय वर्ष में निर्धारित पाठ्यक्रम MHD 12 भारतीय कहानियां के अंतर्गत दीदी नामक कहानी का कथासार प्रस्तुत करेंगे यह कहानी मलयालम भाषा की कहानी है जिसके लेखक एम टी वासुदेवन नायर जी है इस कहानी का हिंदी अनुवाद वी दी कृष्णन नम्पियार जी ने किया है । यह एक बहुत ही मार्मिक कहानी है IGNOU MHD 12 भारतीय कहानी दीदी Bharteey Kahani Didi 'दीदी' कहानी का कथानक   कहानी के पात्र :  अप्पू (4 साल का बच्चा), दीदी (अप्पू की माँ ), नानी (दीदी की मां ), अप्पू के मामा, शंकरन नायर  कथानक अप्पू एक 5-6  साल का बच्चा है जिसका जन्म उसकी मां की कोख से विवाह से पहले हुआ है इसलिए नानी दीदी को बहुत भला बुरा कहकर ताने मारती है और अप्पू और दीदी को भी खूब गालियां देती है जिस कारण अप्पू नानी को पसंद नहीं करता है।  अप्पू की नानी उसे अपनी मां को दीदी के नाम से पुकारना सिखा देती है । अप्पू अपनी मां को दीदी के नाम से पुकारने लगता है और वह दीदी से बेहद प्रेम करता है। अप्पू की दीदी भी अप्पू से बहुत प्यार करती है और उसका बहुत ख्याल रखती है और अपने अतीत को...

बाल विकास एवं शिक्षाशास्त्र के महत्वपूर्ण कथन Bal Vikas Shikshashashtra Mahatwapoorn Kathan

बाल विकास एवं शिक्षाशास्त्र के महत्वपूर्ण कथन  बाल विकास एवं शिक्षाशास्त्र के महत्वपूर्ण कथन Bal Vikas Shikshashashtra Mahatwapoorn Kathan "विकास आंतरिक एवं बाह्य कारणों से व्यक्ति में परिवर्तन है"  अरस्तु "अनुभव द्वारा व्यवहार में रूपांतर लाना ही अधिगम है"  गेट्स "अधिगम व्यक्ति में एक परिवर्तन है जो उसके बाद के परिवर्तनों के अनुसरण में होता है"   ई ए पील   "सीखना, आदतों ज्ञान एवं अभिवृत्तियों का आयोजन है। इसमें कार्यों को करने के नवीन तरीके सम्मिलित हैं और इसकी शुरुआत व्यक्ति द्वारा किसी भी बाधा को दूर करने अथवा नवीन परिस्थितियों में अपने समायोजन को लेकर होती हैं। इसके माध्यम से व्यवहार में उत्तरोत्तर परिवर्तन होता रहता है। यह व्यक्ति को अपने अभिप्राय अथवा लक्ष्य को पाने में समर्थ बनाती है।"     क्रो एवं क्रो "विकास एक क्रमिक एवं मंद गति से चलने वाली प्रक्रिया है"  स्कीनर "बाल मनोविज्ञान का नाम बाल विकास इस लिए रखा गया क्योंकि विकास के अंतर्गत अब बालक के विकास के समस्त पहलुओं पर ध्यान केंद्रित किया जाता है किसी एक पक्ष पर नहीं...

IGNOU MA Hindi Assignment MHD 10 प्रेमचंद की कहानियां

IGNOU MA Hindi Assignment  MHD 10 MHD 10 प्रेमचंद की कहानियां  निम्नलिखित में से किन्ही दो की संदर्भ सहित व्याख्या कीजिए (क) काम ऐसा काम ढूंढना जहां कुछ ऊपरी आय हो। मासिक वेतन तो पूर्णमासी का चांद है, जो एक दिन दिखाई देता है और घटते घटते लुप्त हो जाता है। ऊपरी आय बहता हुआ स्रोत है, जिससे सदैव प्यास मिटती है। वेतन मनुष्य देता है, इसी से उसे वृद्धि नहीं होती। ऊपरी आमदनी ईश्वर देता है, उसी से उसकी बरकत होती है, तुम स्वयं विद्वान हो, तुम्हें क्या समझाऊं। इस विषय में विवेक की बड़ी आवश्यकता है। मनुष्य को देखो, इसकी आवश्यकता को देखो और अवसर देखो, उसके उपरांत जो उचित समझो, करो । गरजवाले आदमी के साथ कठोरता करने में लाभ ही लाभ है। लेकिन बेगराज को दांव पर पाना जरा कठिन है। इन बातों को निगाह में बांध लो मेरी यह मेरी जन्म भर की कमाई है। संदर्भ यह उद्धरण प्रेमचंद के उपन्यास "गोदान" से लिया गया है, जो भारतीय साहित्य में एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है। यह अंश समाज में प्रचलित भ्रष्टाचार और अनैतिकता पर तीखा व्यंग करता है। चलिए इस अंश को विस्तृत रूप में समझते हैं। संदर्भ और पृष्ठभूमि "गोद...