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वैश्वीकरण का अर्थ वैश्वीकरण में भौतिक विज्ञान की भूमिका (Meaning Of Globalization l Role of Physical Science in the Globalization)

वैश्वीकरण का अर्थ  वैश्वीकरण में भौतिक विज्ञान की भूमिका (Meaning Of Globalization Role of Physical Science in the Globalization)  वैश्वीकरण का अर्थ और वैश्वीकरण में भौतिक विज्ञान की भूमिका ​आज की दुनिया में "वैश्वीकरण" (Globalization) एक ऐसा शब्द बन गया है, जो हमारे दैनिक जीवन के लगभग हर पहलू को प्रभावित करता है। हम जो कपड़े पहनते हैं, जो तकनीक इस्तेमाल करते हैं, और यहाँ तक कि जो भोजन हम खाते हैं, वह भी वैश्वीकरण की देन हो सकता है। हालांकि, इस वैश्विक जुड़ाव को मुख्य रूप से एक आर्थिक और राजनीतिक प्रक्रिया माना जाता है, लेकिन इसके पीछे की असली प्रेरक शक्ति विज्ञान है, विशेष रूप से भौतिक विज्ञान (Physical Science) । ​इस लेख में हम वैश्वीकरण के विस्तृत अर्थ और इस पूरी प्रक्रिया को संभव बनाने में भौतिक विज्ञान की महत्वपूर्ण भूमिका पर विस्तार से चर्चा करेंगे। ​वैश्वीकरण का अर्थ (Meaning of Globalization) ​सरल शब्दों में, वैश्वीकरण का अर्थ है विश्व की विभिन्न अर्थव्यवस्थाओं, समाजों और संस्कृतियों का एकीकरण। यह एक ऐसी प्रक्रिया है जिसके तहत दुनिया भर के देश व्यापार, सूचना, तकनी...

वंशानुक्रम और वातावरण Wansaanukram aur watawaran

वंशानुक्रम और वातावरण Wansaanukram aur watawaran  वंशानुक्रम वंशानुक्रम शब्द अंग्रेजी भाषा के शब्द हेरेडिटी (Heredity) का हिंदी अनुवाद है। यह शब्द लैटिन भाषा के हेरेडिटरी(Hereditary) से बना है जिसका अर्थ है, "वह पूंजी जो बालक को माता-पिता से उत्तराधिकार के रूप में मिलती है।" वंशानुक्रम वे सभी तत्व है जो बच्चे के जन्म के साथ ही नहीं बल्कि गर्भाधान के समय भी उसमें उपस्थित होते हैं।वंशानुक्रम के इस धारणा के अंतर्गत शारीरिक, मानसिक और व्यक्तित्व के दूसरे लक्षण होते हैं। शारीरिक लक्षणों में चेहरा, आंखों का रंग, त्वचा, आंखों का आकार, टांगों का आकार, ग्रंथियां व लंबाई इत्यादि सम्मिलित किए जाते है। मानसिक लक्षण मानसिक लक्षणों में प्रवृत्तियां, बुद्धि, स्मरण शक्ति, सूक्ष्म विचार, निर्णय तर्कशक्ति, निर्णय क्षमता तथा ध्यान इत्यादि सम्मिलित किए जाते हैं। व्यक्तित्व लक्षण व्यक्तित्व लक्षण के अंतर्गत व्यवहार, स्वभाव, आदतें, संवेग आदि सम्मिलित किए जाते हैं। उपरोक्त सभी लक्षण बच्चा अपने माता-पिता से प्राप्त करता है इसलिए इन्हें वंशानुक्रम कहा जाता है। वंशानुक्रम के नियम समानता का नियम विभिन्...

मनोवैज्ञानिक जाँच के लक्ष्य अनुसंधान के चरण आँकड़ों की प्रकृति प्रमुख विधियाँ परिमाणात्मक एवं गुणात्मक विश्लेषण और नैतिक मुद्दे

मनोवैज्ञानिक जाँच के लक्ष्य 1. मनोवैज्ञानिक जाँच के लक्ष्य  (Goals of Psychological Enquiry) ​किसी भी अन्य विज्ञान की तरह, मनोवैज्ञानिक अनुसंधान या जाँच के भी कुछ विशिष्ट और स्पष्ट लक्ष्य होते हैं। मनोविज्ञान में किसी व्यवहार या मानसिक प्रक्रिया का अध्ययन करते समय शोधकर्ता मुख्य रूप से निम्नलिखित पाँच लक्ष्यों को प्राप्त करने का प्रयास करते हैं: ​ वर्णन (Description): मनोवैज्ञानिक जाँच का प्रथम और सबसे मूलभूत लक्ष्य व्यवहार या किसी घटना का सटीक रूप से वर्णन करना है। इसके अंतर्गत शोधकर्ता यह तय करता है कि उसे किस विशिष्ट व्यवहार का अध्ययन करना है। चूंकि किसी भी व्यवहार के कई पहलू होते हैं, इसलिए शोधकर्ता उस व्यवहार को छोटे-छोटे हिस्सों में बाँटता है ताकि उसका सूक्ष्मता से अवलोकन किया जा सके। उदाहरण के लिए, यदि लक्ष्य 'आक्रामकता' का अध्ययन करना है, तो शोधकर्ता को यह स्पष्ट रूप से वर्णित करना होगा कि कौन सी क्रियाएँ (जैसे- मारना, चिल्लाना, या अपशब्द कहना) आक्रामकता की श्रेणी में आएंगी। ​ पूर्वानुमान (Prediction): जब एक बार व्यवहार का सटीक वर्णन हो जाता है, तो दूसरा लक्ष्य उ...

पर्यावरण का अर्थ । पर्यावरण का क्षेत्र । पर्यावरण के प्रमुख तत्व । Meaning of Environment । Scope । components

 पर्यावरण का अर्थ । पर्यावरण का क्षेत्र । पर्यावरण के प्रमुख तत्व । Meaning of Environment । Scope । components   पर्यावरण का अर्थ पर्यावरण शब्द अंग्रेजी के  Environment   शब्द का हिंदी रूपांतर है। Environment का अर्थ है  वह बाहरी आवरण जो हमें चारों ओर से घेरे हुए हैं । पर्यावरण से अभिप्राय उन सभी भौतिक दशाओं तथा तत्वों से लिया जाता है जो हमें चारों ओर से घेरे हुए हैं। प्रकृति की जीवित तथा अजीवित तत्वों के समूचे समुच्चय को पर्यावरण कहते हैं। पर्यावरण में चार घटक सम्मिलित हैं:- भूमि, जल, वायु तथा जैविक प्राणी। भूमि, जल तथा वायु भौतिक पर्यावरण का निर्माण करते हैं जबकि पशु पक्षी, पेड़-पौधे तथा मानव जैविक पर्यावरण का निर्माण करते हैं। भौतिक पर्यावरण पर ही जैविक पर्यावरण निर्भर करता है तथा जैविक पर्यावरण भूतल पर प्राणी मात्र को जीवन प्रदान करने के लिए खाद्यान्न सामग्री एवं अन्य वस्तुएं प्रदान करता है। मानव वनस्पति तथा पशु पक्षियों के बिना जीवित नहीं रह सकता। मानव शरीर की रचना भी इन्हीं तत्वों से मिलकर हुई है तथा जीवन की समाप्ति पर शरीर इन्हीं तत्वों में विलीन हो...

मनोविज्ञान क्या है? (What is Psychology?)

   ​अध्याय 1: मनोविज्ञान क्या है?  (What is Psychology?) मनोविज्ञान क्या है?  ​1. एक विद्याशाखा के रूप में मनोविज्ञान  (Psychology as a Discipline) ​मनोविज्ञान को एक विद्याशाखा के रूप में उन ज्ञान के क्षेत्रों में रखा जाता है जो मानव व्यवहार और मानसिक प्रक्रियाओं का व्यवस्थित अध्ययन करते हैं। एक विद्याशाखा होने के नाते, इसमें सिद्धांतों का निर्माण, शोध पद्धतियाँ, और साक्ष्यों पर आधारित निष्कर्ष शामिल हैं। यह केवल 'सामान्य ज्ञान' नहीं, बल्कि एक वैज्ञानिक प्रयास है जो बताता है कि मनुष्य क्यों और कैसे व्यवहार करता है। यह प्राकृतिक विज्ञानों (जैसे जीव विज्ञान) और सामाजिक विज्ञानों (जैसे समाजशास्त्र) के बीच एक सेतु का कार्य करता है। ​2. प्राकृतिक विज्ञान के रूप में मनोविज्ञान  (Psychology as a Natural Science) ​जब हम मनोविज्ञान को एक प्राकृतिक विज्ञान के रूप में देखते हैं, तो हमारा ध्यान मुख्य रूप से जैविक और तंत्रिका संबंधी आधारों पर होता है। ​ वैज्ञानिक पद्धति:  मनोविज्ञान में परिकल्पना (Hypothesis) बनाना, प्रयोग करना और डेटा का विश्लेषण करना शामिल है। ​ ...

शिक्षण में उद्देश्यों की आवश्यकता (Need of Objectives in Teaching

शिक्षण में उद्देश्यों की आवश्यकता (Need of Objectives in Teaching शिक्षण में उद्देश्यों की आवश्यकता(Need of Objectives in Teaching) किसी भी विषय की संपूर्ण जानकारी प्राप्त करने के लिए उसके उद्देश्यों पर विचार करना आवश्यक है। उद्देश्यों के ज्ञान के अभाव में शिक्षण कार्य उचित रूप से नहीं हो सकता। इस विषय में एक विद्वान का कथन है,कि , "उद्देश्य के ज्ञान के बिना शिक्षक उस नाविक के समान है जिसे अपने लक्ष्य का ज्ञान नहीं है तथा उसके शिक्षार्थी उस पतवारहीन नौका  के समान है जो समुद्र की लहरों के थपेड़े खाकर तट की ओर बहती है। " आजकल की शिक्षा का प्रमुख दोष उसका उद्देश्यहीन होना है। अध्यापकों को यह ज्ञात नहीं है कि वे शिक्षा किस उद्देश्य से दे रहे हैं और छात्रों को भी यह ज्ञात नहीं है कि वे किस उद्देश्य से शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। अतः ऐसी दशा में  विज्ञान शिक्षण के उद्देश्यों  को निश्चित करना अति आवश्यक हो जाता है। उद्देश्यों के निर्धारित हो जाने पर अध्यापक तथा छात्र दोनों लाभान्वित होते हैं तथा शिक्षण कार्य सुचारू रूप से चलता है। विषय के प्रति तन्मयता की...

लिंग का अर्थ । लिंग विभेद । प्रकार और कारण Meaning of gender । Gender Discrimination Its Type And Reasons

लिंग का अर्थ । लिंग विभेद । प्रकार और कारण  Meaning of gender । Gender Discrimination Its Type And Reasons   लिंग का अर्थ (Meaning of gender) मनुष्य दो रूपों में जन्म लेता है:- स्त्री और पुरुष जिसे प्रारंभिक अवस्था में बालिका तथा बालक कहा जाता है। बालक तथा बालिकाओं की शारीरिक संरचना में ही विभेद नहीं होता बल्कि दोनों की रुचियों, अभिवृत्तियों तथा क्रियाकलापों में भी विभिन्नता पाई जाती है। जैविक रूप में लिंग को परिभाषित करते हुए कहा जा सकता है कि जब स्त्री तथा पुरुष के XX गुणसूत्र मिलते हैं तब बालिका और स्त्री-पुरुष के XY गुणसूत्र मिलते हैं तो बालक का निर्माण होता है। स्पष्ट है कि लिंग के निर्धारण में जैविक संप्रत्यय महत्वपूर्ण है न की स्त्री या पुरुष की अपनी खुद की इच्छा। लिंग निर्धारण की प्रक्रिया ऐच्छिक न होकर अनेक्छिक है।अतः इस हेतु किसी को भी दोष नहीं दिया जा सकता। फिर भी लिंग के आधार पर भेदभाव किया जाता है तथा बालकों की तुलना में बालिकाओं को तुच्छ समझा जाता है। लिंग एक परिवर्तनशील धारा है जिसमें एक ही संस्कृति, जाति, वर्ग तथा आर्थिक परिस्थितियों और आयु में एक संस्कृति...