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Hindi Kahani | Kanon mein Kangana | Saransh aur Samiksha | Kathanak | Patra Parichay | Samvaad | Deshkaal evam vatavaran | Bhasha Shaili aur Uddeshya

 हिंदी कहानी कानों में कंगना कहानीकार - राजा राधिकारमण प्रसाद सिंह प्रकाशन वर्ष - सन् 1913 हिंदी कहानी कानों में कंगना हिंदी कहानी कानों में कंगना  कानों में  कंगना  कहानी का सारांश  कानों में  कंगना  कहानी की कथावस्तु  कानों में  कंगना  कहानी की भाषा शैली  कानों में  कंगना  कहानी के पात्र परिचय  कानों में कंगना कहानी का उद्देश्य  कानों में कंगन कहानी का देशकाल और वातावरण  कानों में  कंगना  कहानी की समीक्षा  राजा राधिकारमण प्रसाद सिंह द्वारा रचित 'कानों में कंगना' (1913) हिंदी कहानी साहित्य की एक कालजयी और कलात्मक रचना है। यह कहानी अपनी अलंकृत भाषा और नैतिक मूल्यों के ह्रास की मार्मिक अभिव्यक्ति के लिए जानी जाती है। यह उस संक्रमण काल की रचना है जहाँ रीतिकालीन विलासिता और आधुनिक नैतिकता के बीच द्वंद्व दिखाई देता है। ​ ​ 1. कथानक • ​'कानों में कंगना' का कथानक भोग-विलास, नैतिक पतन और अंततः पश्चाताप की एक दुखद यात्रा है। कहानी का आरंभ अत्यंत रूमानी और प्राकृतिक परिवेश में होता है, जहाँ नायक कि...

हिंदी साहित्य का इतिहास आदिकालीन कवि सरहपा

  ​हिंदी साहित्य का इतिहास आदिकालीन कवि सरहपा  ​ नाम एवं अन्य नाम: इनका मूल नाम सरहपाद था, जिन्हें 'सरोजवज्र' और 'राहुलभद्र' के नाम से भी जाना जाता है। जनश्रुति के अनुसार, 'सर' (बाण) बनाने वाली एक कन्या के संपर्क में आने और उससे प्रभावित होने के कारण इनका नाम 'सरहपा' पड़ा। ​ समय: महापंडित राहुल सांकृत्यायन ने शोध के आधार पर इनका समय 769 ई. (8वीं शताब्दी) स्थिर किया है, जो हिंदी साहित्य के इतिहास में सर्वमान्य माना जाता है। ​ जन्म एवं शिक्षा: इनका जन्म एक ब्राह्मण परिवार में हुआ था। इन्होंने उस समय के प्रसिद्ध नालंदा विश्वविद्यालय से शिक्षा प्राप्त की। साधना के क्षेत्र में इन्होंने बौद्ध धर्म की 'वज्रयान' शाखा को चुना और सिद्ध कहलाए। ​ धार्मिक दर्शन: वे राजा धर्मपाल के समकालीन थे। जीवन के उत्तरार्ध में उन्होंने पारंपरिक ब्राह्मणवादी कर्मकांडों का त्याग कर सहजयान का प्रवर्तन किया, जो सहज साधना और आंतरिक शुद्धि पर बल देता था। ​ व्यक्तित्व: सरहपा एक विद्रोही और क्रांतिकारी व्यक्तित्व के स्वामी थे। उन्होंने किताबी ज्ञान के स्थान पर '...

दर्शन का अर्थ एवं परिभाषा | Darshan Ka Arth Evam Paribhasha

दर्शन का अर्थ दर्शन अंग्रेजी भाषा के  फिलॉस्फी ( Phylosphy )  शब्द का रूपांतर है। इस शब्द की उत्पत्ति ग्रीक के दो शब्दों ' फिलोस ' तथा ' सोफिया ' से हुई है। ' फिलोस ' का अर्थ है -  प्रेम अथवा अनुराग  और ' सोफिया ' का अर्थ है -  ज्ञान  । इस प्रकार  फिलॉसफी  अर्थात  दर्शन  का शाब्दिक अर्थ ज्ञान अनुराग अथवा ज्ञान का प्रेम है। ज्ञान तथा सत्य की खोज करना तथा उसके वास्तविक स्वरूप का प्रयोग करने वाले व्यक्ति को  दर्शनिक  कहा जाता है। दर्शन का अर्थ एवं परिभाषा | Darshan Ka Arth Evam Paribhasha प्लेटो  ने अपनी पुस्तक  रिपब्लिक  में लिखा है,  '' जो व्यक्ति ज्ञान प्राप्त करने तथा नई नई बातों को जानने के लिए रुचि प्रकट करता है तथा जो कभी संतुष्ट नहीं होता, उसे दार्शनिक कहा जाता है।" शिक्षा एवं फिलॉसफी के संदर्भ में इसके अर्थ की व्याख्या की गई है। फिलॉसफी को शिक्षा का सिद्धांत कहते हैं। फिलोसोफी की व्यवहारिकता शिक्षा द्वारा की जाती है परंतु अन्य विषयों की भांति  दर्शन भी एक अध्ययन विषय है जिसके अंतर्गत सत्य का क्या ...

गणित शिक्षण का महत्व importance of mathematics in daily life

नमस्कार साथियों! Target With Roshani हिंदी ब्लॉग में आपका एक बार फिर से स्वागत है। मित्रों। B.Ed शिक्षा के अंतर्गत इस आर्टिकल के अंतर्गत हम शिक्षा के क्षेत्र में गणित का महत्व को समझेंगे। गणित शिक्षण का महत्व importance of mathematics in daily life इस आर्टिकल को पढ़ने के बाद आप निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर देने में सक्षम होंगे- १. शिक्षा में  गणित  के महत्व की विवेचना कीजिए Discuss the importance of mathematics in education. २.आधुनिक जीवन में गणित की उपयोगिता उपयोगिता को स्पष्ट कीजिए। Explain the utility of  mathematics  in modern life. शिक्षण में गणित का महत्व अथवा उपयोगिता (Importance or utility of mathematics in education) शिक्षा के क्षेत्र में गणित का अत्यधिक महत्व है। गणित का हमारे दैनिक जीवन में गणित के संबंध है। आधुनिक युग में सभ्यता का आधार गणित ही है। मातृभाषा के अलावा ऐसा कोई विषय नहीं है जो दैनिक जीवन में इतना अधिक संबंधित हो। गणित को व्यापार का प्राण एवं विज्ञान का जन्मदाता माना जाता है।  वर्तमान समय में गणित को विद्यालय के पाठ्य विषयों में विशेष स्थ...

गणित का अर्थ एवं प्रकृति Meaning and Nature Of Mathematics

गणित का अर्थ एवं प्रकृति Meaning and Nature Of Mathematics इस लेख को पढ़ने के बाद आप सभी निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर देने में सक्षम होंगे  गणित का अर्थ क्या होता है? What is the meaning of mathematics? गणित की प्रमुख परिभाषायें क्या है? What are the main definitions of mathematics? गणित की प्रकृति क्या होती है? What is the nature of mathematics? गणित का अर्थ Meaning Of Mathematics 'गणित' शब्द बहुत प्राचीन है तथा वैदिक साहित्य में इसका बहुत ही ज्यादा उपयोग किया गया है। गणित शब्द का शाब्दिक अर्थ है- "वह शास्त्र जिसमें गणना की प्रधानता हो।" इस प्रकार कहा जा सकता है कि गणित अंक, आधार, चिन्ह आदि संक्षिप्त संकेतों का वह विधान है जिसकी सहायता से परिमाण दिशा तथा स्थान का बोध होता है। गणित विषय का प्रारंभ गिनती से ही हुआ है और संख्या पद्धति उसका एक विशेष क्षेत्र है, जिसकी सहायता से गणित के अन्य शाखाओं का विकास किया गया है। प्राचीन भारत में गणित में संख्याएं, गणना, ज्योतिष एवं क्षेत्र गणित सम्मिलित थे। कुछ विद्वानों का मत है कि हिंदू गणित के अंतर्गत परीकर्म, व्यवहार क्षेत्र गण...

प्रेमचंद की कहानियों में निहित राष्ट्रीय चेतना Premchand kahani aur Rashtriya Chetna

प्रेमचंद की कहानियों में निहित राष्ट्रीय चेतना पर प्रकाश डालिए। प्रेमचंद, हिंदी और उर्दू साहित्य के महान कथाकार, अपनी कहानियों में सामाजिक, आर्थिक, और राजनीतिक मुद्दों को प्रमुखता से उकेरते हैं। उनकी कहानियों में निहित राष्ट्रीय चेतना एक महत्वपूर्ण पहलू है, जो भारतीय समाज की विविध पहलुओं को प्रस्तुत करती है। प्रेमचंद की कहानियां न केवल मनोरंजन का साधन है, बल्कि वह एक गहन सामाजिक संदेश भी देती हैं। प्रेमचंद की कहानियों में राष्ट्रीय चेतना के विभिन्न आयामों का स्पष्ट चित्रण मिलता है। उनकी रचनाओं में स्वतंत्रता संग्राम, ग्रामीण जीवन, सामाजिक असमानता, और भारतीय संस्कृति के प्रति गर्व के भाव प्रमुखता से उभरते हैं। 1.स्वतंत्रता संग्राम की झलक प्रेमचंद की कहानियों में स्वतंत्रता संग्राम के संघर्ष और बलिदान का सजीव चित्रण मिलता है। उनकी कहानी ब्रिटिश शासन के खिलाफ भारतीयों के संघर्ष को प्रस्तुत करती है। "सोज़े वतन"(1907) उनकी प्रारंभिक कहानियों का संग्रह हैं ,जिसमें उन्होंने ब्रिटिश शासन के अत्याचारों और भारतीय जनता के संघर्ष को दर्शाया है । "पूस की रात" जैसी कहानियां ब्रिट...

प्रेमचंद के दलित जीवन संबंधी विचार Premchand Ke Dalit Sambandhi Vichar

मंदिर' और ' सद्गति' कहानी के आधार पर प्रेमचंद के दलित जीवन संबंधी विचारों की विवेचना कीजिए। प्रेमचंद हिंदी साहित्य के प्रमुख स्तंभों में से एक है, जिन्होंने समाज के विभिन्न पहलुओं का गंभीर अध्ययन और चित्रण किया। उनकी रचनाओं में विशेष रूप से दलित जीवन की समस्याओं और उनकी सामाजिक स्थिति पर गहरा दृष्टिकोण मिलता है। उनकी कहानियां ' मंदिर' और ' सद्गति' दलित जीवन की पीड़ा, संघर्ष और समाज की निर्दयता को बहुत ही मार्मिकता तरीके से प्रस्तुत करती है। इन कहानियों के माध्यम से प्रेमचंद ने दलित जीवन संबंधी अपने विचारों को प्रकट किया है। 'मंदिर' कहानी: 'मंदिर'कहानी में प्रेमचंद ने दलितों के धार्मिक और सामाजिक भेदभाव को उजागर किया है। इस कहानी का मुख्य पात्र जलधारी एक दलित है, जो मंदिर में प्रवेश करना चाहता है। लेकिन उसकी यह आकांक्षा उच्च जाति के लोगों को स्वीकार नहीं है। जलधारी का मंदिर में प्रवेश करने की इच्छा एक सामान्य धार्मिक आकांक्षा है, लेकिन समाज इसे उसकी जाति के कारण पाप समझता है।  जलधारी की यह इच्छा उसे समाज के उच्च वर्गों के क्रोध और हिंसा का शिक...