अध्याय 4: मानव विकास (Human Development) अध्याय 4: मानव विकास (Human Development) 1. विकास का अर्थ एवं जीवन-पर्यंत परिप्रेक्ष्य (Meaning of Development and Life-Span Perspective) विकास का अर्थ: मानव विकास का तात्पर्य गर्भाधान (Conception) से लेकर मृत्यु तक मानव जीवन में होने वाले व्यवस्थित, क्रमिक और पूर्वानुमानित परिवर्तनों से है। इसमें शारीरिक, संज्ञानात्मक (मानसिक) और मनोसामाजिक परिवर्तन शामिल होते हैं। वृद्धि बनाम विकास: 'वृद्धि' केवल मात्रात्मक परिवर्तनों (जैसे वजन या ऊंचाई बढ़ना) को दर्शाती है, जबकि 'विकास' में मात्रात्मक और गुणात्मक (जैसे परिपक्वता या समझ का बढ़ना) दोनों परिवर्तन शामिल होते हैं। विकास एक बहुत व्यापक और निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है। जीवन-पर्यंत परिप्रेक्ष्य (Life-Span Perspective): प्रसिद्ध मनोवैज्ञानिकों (जैसे पॉल बाल्ट्स) द्वारा प्रस्तुत यह दृष्टिकोण विकास को केवल बचपन या किशोरावस्था तक सीमित नहीं मानता, बल्कि इसे पूरी उम्र चलने वाली प्रक्रिया मानता है। इसकी मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित हैं: आजीवन प्रक्रिया: विकास जन्म से ...
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