Hindi Kahani Kafan | Munshi Premchand ki kahani Kafan | Hindi kahani Kafan ka Saransh tatha Samiksha
हिंदी कहानी - कफन कहानीकार - मुंशी प्रेमचंद प्रकाशन वर्ष - सन् 1936 हिंदी कहानी कफन हिंदी कहानी कफन हिंदी कहानी कफन का सारांश मुंशी प्रेमचंद की कहानी कफन की कथावस्तु हिंदी कहानी कफन पात्र परिचय हिंदी कहानी कफन देश काल और वातावरण हिंदी कहानी कफन की समीक्षा हिंदी कहानी कफन का संवाद हिंदी कहानी कफन का उद्देश्य मुंशी प्रेमचंद की अंतिम और सबसे महत्वपूर्ण कहानी 'कफन' (1936) हिंदी साहित्य की एक युगांतकारी रचना है। यह कहानी न केवल प्रेमचंद के 'आदर्शोन्मुख यथार्थवाद' से 'नग्न यथार्थवाद' की ओर संक्रमण का प्रतीक है, बल्कि यह सामंती समाज और गरीबी के उस वीभत्स रूप को उजागर करती है जहाँ मानवीय संवेदनाएँ दम तोड़ देती हैं। 1. कथानक • ' कफन' का कथानक अत्यंत संक्षिप्त होते हुए भी गहरा प्रभाव छोड़ता है। कहानी की शुरुआत एक झोपड़ी के बाहर अलाव तापते पिता घीसू और पुत्र माधव से होती है, जबकि भीतर माधव की पत्नी बुधिया प्रसव-वेदना से तड़प रही है। दोनों इस डर से अंदर नहीं जाते कि उनके जाने पर दूसरा व्यक्ति बचे हुए उबले आलू अधिक खा लेगा। अंततः बुध...