Skip to main content

Posts

शिक्षा की परिभाषाएं definitions of education

शिक्षा की परिभाषाएं  definitions of education  Shiksha Ki Paribhashayen शिक्षा की परिभाषाएं definitions of education Shiksha Ki Paribhashayen विभिन्न विद्वानों द्वारा दी गई शिक्षा की परिभाषाएं निम्न प्रकार हैं :- कौटिल्य  के अनुसार शिक्षा की परिभाषा " शिक्षा मानव को एक सुयोग्य नागरिक बनाना सिखाती है तथा उसका व्यक्तिगत विकास करती है।" हेंडरसन  के अनुसार शिक्षा की परिभाषा, " यदि शिक्षा केवल सामाजिक विरासत को एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक हस्तांतरित करती है तो वह केवल अतीत की पुनरावृत्ति करती है। शिक्षा केवल बच्चों की अभिवृद्धि और विकास की प्रक्रिया अर्थात एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें सामाजिक वातावरण के रूप में सामाजिक विरासत को उत्तम और बुद्धिमान पुरुषों एवं स्त्रियों के विकास के लिए प्रयोग किया जा सके। यह शिक्षा की वही प्रक्रिया है जिसका समर्थन दार्शनिकों और शिक्षा सुधारकों ने किया है। यही शिक्षा की सत्य धारणा है।" वॉशिंग  के अनुसार शिक्षा की परिभाषा, " शिक्षा चैतन्य रूप में एक नियंत्रित प्रक्रिया है जिसके द्वारा व्यक्ति के व्यवहार में परिवर्तन किए जाते हैं तथा व्यक्...

हिंदी कहानी | ताई | कथावस्तु | पात्र परिचय | भाषा शैली | समीक्षा

  हिंदी कहानी - ताई कहानीकार - विशंभरनाथ शर्मा 'कौशिक' हिंदी कहानी 'ताई'  हिंदी कहानी ताई  हिंदी कहानी ताई का सारांश  मुंशी प्रेमचंद की कहानी ताई की कथावस्तु  हिंदी कहानी ताई पात्र परिचय  हिंदी कहानी ताई देश काल और वातावरण  हिंदी कहानी ताई की समीक्षा  हिंदी कहानी ताई का संवाद  हिंदी कहानी ताई का उद्देश्य  • विशंभरनाथ शर्मा 'कौशिक' जी हिंदी कहानी के उन स्तंभों में से हैं जिन्होंने प्रेमचंद की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए घरेलू जीवन और मानवीय संवेदनाओं का सूक्ष्म चित्रण किया है। • उनकी कालजयी कहानी 'ताई' पारिवारिक मनोविज्ञान और हृदय परिवर्तन की एक मिसाल है। यह कहानी दिखाती है कि कैसे ईर्ष्या और घृणा की अग्नि प्रेम की शीतल फुहार से शांत हो सकती है। हिंदी कहानी के छः तत्व 1. कथानक 2. पात्र व चरित्र चित्रण 3. संवाद 4. देशकाल और वातावरण 5. भाषा शैली 6. उद्देश्य ​ 1. कथानक  ​'ताई' कहानी का कथानक मध्यमवर्गीय संयुक्त परिवार के भीतर की मानसिक उथल-पुथल पर आधारित है। कहानी के केंद्र में रामेश्वरी हैं, जो नि:संतान होने के कारण मन ही मन ...

हिंदी कहानी | कफन | कथावस्तु | पात्र परिचय | भाषा शैली | समीक्षा

  हिंदी कहानी - कफन कहानीकार - मुंशी प्रेमचंद प्रकाशन वर्ष - सन् 1936 हिंदी कहानी कफन  हिंदी कहानी कफन  हिंदी कहानी कफन का सारांश  मुंशी प्रेमचंद की कहानी कफन की कथावस्तु  हिंदी कहानी कफन पात्र परिचय  हिंदी कहानी कफन देश काल और वातावरण  हिंदी कहानी कफन की समीक्षा  हिंदी कहानी कफन का संवाद  हिंदी कहानी कफन का उद्देश्य  मुंशी प्रेमचंद की अंतिम और सबसे महत्वपूर्ण कहानी 'कफन' (1936) हिंदी साहित्य की एक युगांतकारी रचना है। यह कहानी न केवल प्रेमचंद के 'आदर्शोन्मुख यथार्थवाद' से 'नग्न यथार्थवाद' की ओर संक्रमण का प्रतीक है, बल्कि यह सामंती समाज और गरीबी के उस वीभत्स रूप को उजागर करती है जहाँ मानवीय संवेदनाएँ दम तोड़ देती हैं। ​ ​ 1. कथानक • ​' कफन' का कथानक अत्यंत संक्षिप्त होते हुए भी गहरा प्रभाव छोड़ता है। कहानी की शुरुआत एक झोपड़ी के बाहर अलाव तापते पिता घीसू और पुत्र माधव से होती है, जबकि भीतर माधव की पत्नी बुधिया प्रसव-वेदना से तड़प रही है। दोनों इस डर से अंदर नहीं जाते कि उनके जाने पर दूसरा व्यक्ति बचे हुए उबले आलू अधिक खा लेगा। अंततः बुध...

हिंदी कहानी | कानों में कंगना | कथावस्तु | पात्र परिचय | भाषा शैली | समीक्षा

 हिंदी कहानी कानों में कंगना कहानीकार - राजा राधिकारमण प्रसाद सिंह प्रकाशन वर्ष - सन् 1913 हिंदी कहानी कानों में कंगना हिंदी कहानी कानों में कंगना  कानों में  कंगना  कहानी का सारांश  कानों में  कंगना  कहानी की कथावस्तु  कानों में  कंगना  कहानी की भाषा शैली  कानों में  कंगना  कहानी के पात्र परिचय  कानों में कंगना कहानी का उद्देश्य  कानों में कंगन कहानी का देशकाल और वातावरण  कानों में  कंगना  कहानी की समीक्षा  राजा राधिकारमण प्रसाद सिंह द्वारा रचित 'कानों में कंगना' (1913) हिंदी कहानी साहित्य की एक कालजयी और कलात्मक रचना है। यह कहानी अपनी अलंकृत भाषा और नैतिक मूल्यों के ह्रास की मार्मिक अभिव्यक्ति के लिए जानी जाती है। यह उस संक्रमण काल की रचना है जहाँ रीतिकालीन विलासिता और आधुनिक नैतिकता के बीच द्वंद्व दिखाई देता है। ​ ​ 1. कथानक • ​'कानों में कंगना' का कथानक भोग-विलास, नैतिक पतन और अंततः पश्चाताप की एक दुखद यात्रा है। कहानी का आरंभ अत्यंत रूमानी और प्राकृतिक परिवेश में होता है, जहाँ नायक कि...