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हिंदी साहित्य का इतिहास आदिकालीन कवि सरहपा

  ​हिंदी साहित्य का इतिहास आदिकालीन कवि सरहपा  ​ नाम एवं अन्य नाम: इनका मूल नाम सरहपाद था, जिन्हें 'सरोजवज्र' और 'राहुलभद्र' के नाम से भी जाना जाता है। जनश्रुति के अनुसार, 'सर' (बाण) बनाने वाली एक कन्या के संपर्क में आने और उससे प्रभावित होने के कारण इनका नाम 'सरहपा' पड़ा। ​ समय: महापंडित राहुल सांकृत्यायन ने शोध के आधार पर इनका समय 769 ई. (8वीं शताब्दी) स्थिर किया है, जो हिंदी साहित्य के इतिहास में सर्वमान्य माना जाता है। ​ जन्म एवं शिक्षा: इनका जन्म एक ब्राह्मण परिवार में हुआ था। इन्होंने उस समय के प्रसिद्ध नालंदा विश्वविद्यालय से शिक्षा प्राप्त की। साधना के क्षेत्र में इन्होंने बौद्ध धर्म की 'वज्रयान' शाखा को चुना और सिद्ध कहलाए। ​ धार्मिक दर्शन: वे राजा धर्मपाल के समकालीन थे। जीवन के उत्तरार्ध में उन्होंने पारंपरिक ब्राह्मणवादी कर्मकांडों का त्याग कर सहजयान का प्रवर्तन किया, जो सहज साधना और आंतरिक शुद्धि पर बल देता था। ​ व्यक्तित्व: सरहपा एक विद्रोही और क्रांतिकारी व्यक्तित्व के स्वामी थे। उन्होंने किताबी ज्ञान के स्थान पर '...