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शिक्षा मनोविज्ञान व उसकी प्रकृति Shiksha manovigyaan aur uski prakriti

शिक्षा मनोविज्ञान व उसकी प्रकृति  Shiksha manovigyaan aur uski prakriti मनोविज्ञान के विभिन्न परिभाषाएं अरस्तु  के अनुसार, " मनोविज्ञान आत्मा का ज्ञान है।" मैकदुग्गल  के अनुसार, " मनोविज्ञान मन का विज्ञान है।" सिगमंड फ्रायड  के अनुसार, "मनोविज्ञान चेतना का विज्ञान है।" पील्सबरी  के अनुसार, "मनोविज्ञान व्यवहार का विज्ञान है।" मनोविज्ञान से संबंधित महत्वपूर्ण तथ्य 1879 ई. को सर्वप्रथम विलियम बुंट के द्वारा मनोविज्ञान की प्रयोगशाला स्थापित की गई जो बर्लिन (जर्मनी) में स्थित है। 1890 को सर्वप्रथम विलियम जेम्स के द्वारा मनोविज्ञान का क्रम बद्ध अध्ययन किया गया। 1900 ई. में शिक्षा मनोविज्ञान एक विषय के रूप में प्रारंभ हुआ। 1920 से शिक्षा मनोविज्ञान का अध्ययन स्कूलों में प्रारंभ हुआ। 1930 में शिक्षा मनोविज्ञान विषय सर्वप्रथम भारत के कलकत्ता शहर में के.एमसी के द्वारा शुरू किया गया जिसकी अध्यक्ष ए.के घोष थे। शिक्षा मनोविज्ञान के अनुसार सीखने के स्तर स्मृति स्तर: 2 से 7 वर्ष अवाबोधन स्तर: 7 से 11 वर्ष चिंतन स्तर: 11 से 15 वर्ष शिक्षा मनोविज्ञान का कार्यक्षे...

वैश्वीकरण का अर्थ वैश्वीकरण में भौतिक विज्ञान की भूमिका (Meaning Of Globalization l Role of Physical Science in the Globalization)

वैश्वीकरण का अर्थ  वैश्वीकरण में भौतिक विज्ञान की भूमिका (Meaning Of Globalization Role of Physical Science in the Globalization)  वैश्वीकरण का अर्थ और वैश्वीकरण में भौतिक विज्ञान की भूमिका ​आज की दुनिया में "वैश्वीकरण" (Globalization) एक ऐसा शब्द बन गया है, जो हमारे दैनिक जीवन के लगभग हर पहलू को प्रभावित करता है। हम जो कपड़े पहनते हैं, जो तकनीक इस्तेमाल करते हैं, और यहाँ तक कि जो भोजन हम खाते हैं, वह भी वैश्वीकरण की देन हो सकता है। हालांकि, इस वैश्विक जुड़ाव को मुख्य रूप से एक आर्थिक और राजनीतिक प्रक्रिया माना जाता है, लेकिन इसके पीछे की असली प्रेरक शक्ति विज्ञान है, विशेष रूप से भौतिक विज्ञान (Physical Science) । ​इस लेख में हम वैश्वीकरण के विस्तृत अर्थ और इस पूरी प्रक्रिया को संभव बनाने में भौतिक विज्ञान की महत्वपूर्ण भूमिका पर विस्तार से चर्चा करेंगे। ​वैश्वीकरण का अर्थ (Meaning of Globalization) ​सरल शब्दों में, वैश्वीकरण का अर्थ है विश्व की विभिन्न अर्थव्यवस्थाओं, समाजों और संस्कृतियों का एकीकरण। यह एक ऐसी प्रक्रिया है जिसके तहत दुनिया भर के देश व्यापार, सूचना, तकनी...

वंशानुक्रम और वातावरण Wansaanukram aur watawaran

वंशानुक्रम और वातावरण Wansaanukram aur watawaran  वंशानुक्रम वंशानुक्रम शब्द अंग्रेजी भाषा के शब्द हेरेडिटी (Heredity) का हिंदी अनुवाद है। यह शब्द लैटिन भाषा के हेरेडिटरी(Hereditary) से बना है जिसका अर्थ है, "वह पूंजी जो बालक को माता-पिता से उत्तराधिकार के रूप में मिलती है।" वंशानुक्रम वे सभी तत्व है जो बच्चे के जन्म के साथ ही नहीं बल्कि गर्भाधान के समय भी उसमें उपस्थित होते हैं।वंशानुक्रम के इस धारणा के अंतर्गत शारीरिक, मानसिक और व्यक्तित्व के दूसरे लक्षण होते हैं। शारीरिक लक्षणों में चेहरा, आंखों का रंग, त्वचा, आंखों का आकार, टांगों का आकार, ग्रंथियां व लंबाई इत्यादि सम्मिलित किए जाते है। मानसिक लक्षण मानसिक लक्षणों में प्रवृत्तियां, बुद्धि, स्मरण शक्ति, सूक्ष्म विचार, निर्णय तर्कशक्ति, निर्णय क्षमता तथा ध्यान इत्यादि सम्मिलित किए जाते हैं। व्यक्तित्व लक्षण व्यक्तित्व लक्षण के अंतर्गत व्यवहार, स्वभाव, आदतें, संवेग आदि सम्मिलित किए जाते हैं। उपरोक्त सभी लक्षण बच्चा अपने माता-पिता से प्राप्त करता है इसलिए इन्हें वंशानुक्रम कहा जाता है। वंशानुक्रम के नियम समानता का नियम विभिन्...

पर्यावरण का अर्थ । पर्यावरण का क्षेत्र । पर्यावरण के प्रमुख तत्व । Meaning of Environment । Scope । components

 पर्यावरण का अर्थ । पर्यावरण का क्षेत्र । पर्यावरण के प्रमुख तत्व । Meaning of Environment । Scope । components   पर्यावरण: अर्थ, क्षेत्र और इसके प्रमुख तत्वों का विस्तृत और गहन अध्ययन ​मानव जीवन और प्रकृति के बीच का संबंध उतना ही प्राचीन है जितना कि स्वयं मानव सभ्यता। प्राचीन भारतीय दर्शन में भी यह माना गया है कि हमारा शरीर पांच तत्वों—क्षिति (पृथ्वी), जल, पावक (अग्नि), गगन (आकाश) और समीर (वायु)—से मिलकर बना है, और यही पांच तत्व हमारे आस-पास के जगत का भी निर्माण करते हैं। हमारे चारों ओर का यह विशाल, रहस्यमयी और जीवनदायी ताना-बाना ही 'पर्यावरण' कहलाता है। ​पर्यावरण कोई स्थिर या जड़ वस्तु नहीं है; यह एक अत्यंत गतिशील प्रणाली है जिसमें हर पल बदलाव होते रहते हैं। यह लेख पर्यावरण के अर्थ, इसके अत्यंत व्यापक क्षेत्र और उन प्रमुख तत्वों का गहराई से विश्लेषण करता है, जो इस जटिल व्यवस्था को संचालित करते हैं। ​पर्यावरण का अर्थ  (Meaning of Environment) ​व्याकरण और शब्द-रचना के आधार पर 'पर्यावरण' शब्द हिंदी के दो शब्दों से मिलकर बना है: 'परि' (Pari) और 'आवरण' ...

शिक्षण में उद्देश्यों की आवश्यकता (Need of Objectives in Teaching

शिक्षण में उद्देश्यों की आवश्यकता (Need of Objectives in Teaching शिक्षण में उद्देश्यों की आवश्यकता(Need of Objectives in Teaching) किसी भी विषय की संपूर्ण जानकारी प्राप्त करने के लिए उसके उद्देश्यों पर विचार करना आवश्यक है। उद्देश्यों के ज्ञान के अभाव में शिक्षण कार्य उचित रूप से नहीं हो सकता। इस विषय में एक विद्वान का कथन है,कि , "उद्देश्य के ज्ञान के बिना शिक्षक उस नाविक के समान है जिसे अपने लक्ष्य का ज्ञान नहीं है तथा उसके शिक्षार्थी उस पतवारहीन नौका  के समान है जो समुद्र की लहरों के थपेड़े खाकर तट की ओर बहती है। " आजकल की शिक्षा का प्रमुख दोष उसका उद्देश्यहीन होना है। अध्यापकों को यह ज्ञात नहीं है कि वे शिक्षा किस उद्देश्य से दे रहे हैं और छात्रों को भी यह ज्ञात नहीं है कि वे किस उद्देश्य से शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। अतः ऐसी दशा में  विज्ञान शिक्षण के उद्देश्यों  को निश्चित करना अति आवश्यक हो जाता है। उद्देश्यों के निर्धारित हो जाने पर अध्यापक तथा छात्र दोनों लाभान्वित होते हैं तथा शिक्षण कार्य सुचारू रूप से चलता है। विषय के प्रति तन्मयता की...

लिंग का अर्थ । लिंग विभेद । प्रकार और कारण Meaning of gender । Gender Discrimination Its Type And Reasons

लिंग का अर्थ । लिंग विभेद । प्रकार और कारण  Meaning of gender । Gender Discrimination Its Type And Reasons   लिंग का अर्थ (Meaning of gender) मनुष्य दो रूपों में जन्म लेता है:- स्त्री और पुरुष जिसे प्रारंभिक अवस्था में बालिका तथा बालक कहा जाता है। बालक तथा बालिकाओं की शारीरिक संरचना में ही विभेद नहीं होता बल्कि दोनों की रुचियों, अभिवृत्तियों तथा क्रियाकलापों में भी विभिन्नता पाई जाती है। जैविक रूप में लिंग को परिभाषित करते हुए कहा जा सकता है कि जब स्त्री तथा पुरुष के XX गुणसूत्र मिलते हैं तब बालिका और स्त्री-पुरुष के XY गुणसूत्र मिलते हैं तो बालक का निर्माण होता है। स्पष्ट है कि लिंग के निर्धारण में जैविक संप्रत्यय महत्वपूर्ण है न की स्त्री या पुरुष की अपनी खुद की इच्छा। लिंग निर्धारण की प्रक्रिया ऐच्छिक न होकर अनेक्छिक है।अतः इस हेतु किसी को भी दोष नहीं दिया जा सकता। फिर भी लिंग के आधार पर भेदभाव किया जाता है तथा बालकों की तुलना में बालिकाओं को तुच्छ समझा जाता है। लिंग एक परिवर्तनशील धारा है जिसमें एक ही संस्कृति, जाति, वर्ग तथा आर्थिक परिस्थितियों और आयु में एक संस्कृति...

शिक्षक के विभिन्न स्तर ( shikshan ke vibhinn ster)

शिक्षण के विभिन्न स्तर (Different levels of Teaching)  इस लेख को पढ़ने के बाद आप निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दे पाने में समर्थ हो सकेंगे १. शिक्षण के विभिन्न स्तर कौन-कौन से हैं? विस्तार पूर्वक उल्लेख कीजिए। २. शिक्षण के विभिन्न स्तरों को बताइए। स्मृति स्तर के शिक्षण की व्याख्या कीजिए। ३. शिक्षण के स्मृति, बोध तथा चिंतन स्तर की प्रमुख विशेषताओं की विवेचना कीजिए। ४. चिंतन स्तर के शिक्षण की संक्षिप्त विवेचना कीजिए। शिक्षण को एक उद्देश्य पूर्ण प्रक्रिया माना जाता है। इस प्रक्रिया का संबंध अधिगम से बहुत ही गहरा है। पाठ्यवस्तु का अपना स्वरूप होता है जिससे शिक्षण के विभिन्न उद्देश्यों को प्राप्त किया जा सके। पाठ्यवस्तु को निम्नलिखित तीन स्तर पर प्रस्तुत किया जा सकता है।          स्मृति   स्तर   का   शिक्षण ( Memory Level of Teaching)      बोध   स्तर   का   शिक्षण ( Understanding Level of Teaching)      चिंतन   स्तर   का   शिक्षण ( Reflective Level Of Teaching)    १. स्मृति ...