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वैश्वीकरण का अर्थ वैश्वीकरण में भौतिक विज्ञान की भूमिका (Meaning Of Globalization l Role of Physical Science in the Globalization)

वैश्वीकरण का अर्थ l वैश्वीकरण में भौतिक विज्ञान की भूमिका (Meaning Of Globalization l Role of Physical Science in the Globalization)
वैश्वीकरण का अर्थ  वैश्वीकरण में भौतिक विज्ञान की भूमिका (Meaning Of Globalization l Role of Physical Science in the Globalization) 

वैश्वीकरण शब्द अंग्रेजी भाषा के ग्लोबलाइजेशन शब्द का हिंदी रूपांतरण है। वैश्वीकरण को भूमंडलीकरण भी कहा जाता है। इन दोनों शब्दों का अभिप्राय एक ऐसी प्रक्रिया से है जिसमें आपस में दूरी रखने तथा अन्य प्रकार के अवरोधों को दूर कर विश्व के सभी व्यक्तियों को अधिक से अधिक निकट आने तथा अंतः निर्भर रहने पर बल दिया जाता है। वैश्वीकरण के अर्थ को और अधिक स्पष्ट करने के लिए कुछ विद्वानों ने परिभाषाएं दिए हैं जिनका विवरण कुछ इस प्रकार है:-

  • हॉलैंड निवासी शिक्षा शास्त्री रूड लूब्बस के अनुसार, "वैश्वीकरण व प्रक्रिया है जिसमें सीमा पार आर्थिक राजनीतिक और सामाजिक सांस्कृतिक संबंधों को स्थापित करने और बनाए रखने में भौगोलिक दूरी का कोई महत्व नहीं रह जाता।"


  • प्रसिद्ध समाजशास्त्री एंथोनी गिड्डेंस के अनुसार, "वैश्वीकरण दूरी और समय को सीमित करने का प्रयास है जिसमें संप्रेषण के माध्यम से तुरंत ही पूरे विश्व में एक साथ ज्ञान एवं संस्कृति का आदान प्रदान किया जा सकता है।"


  • डेविड हेल्ड और एंथोनी मैकग्रा के अनुसार, "वैश्वीकरण को एक ऐसी प्रक्रिया के रूप में मान्यता दी जा सकती है जिसके माध्यम से भूमंडलीय, सामाजिक संबंधों और आदान-प्रदान को अच्छी तरह से अंतर महाद्वीपीय और अंतर क्षेत्रीय क्रियाओं, अन्तःक्रियाओं तथा शक्तियों के आदान प्रदान करने वाले नेटवर्क के रूप में बदला जा सकता है।"


    उपरोक्त परिभाषा के आधार पर वैश्वीकरण का अर्थ और प्रकृति के संबंध में निम्नलिखित तथ्य विचारणीय है:-

    • वैश्वीकरण को संभव बनाने में संप्रेषण की आधुनिकतम प्रणाली ने महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
    • विश्व के सभी व्यक्तियों और समुदायों के बीच किसी क्षेत्रीय अथवा अंतरराष्ट्रीय सीमा की परवाह न करते हुए आर्थिक, राजनीतिक, सामाजिक और सांस्कृतिक संबंध स्थापित करने और बनाए रखने में वैश्वीकरण से उचित सहायता मिली है।
    • वैश्वीकरण से समय एवं दूरी संबंधित सभी प्रकार के अवरोध समाप्त किए जा सकते हैं।
    • वैश्वीकरण का उद्देश्य संसार के सभी व्यक्तियों और समुदायों के बीच ज्ञान और संस्कृति का आदान प्रदान करना है।
    • दुनियां के विभिन्न क्षेत्रों और महाद्वीपों में विराजमान व्यक्तियों और समुदायों के बीच की दूरी को वैश्वीकरण इतना कम कर देता है कि वे आपस में सामाजिक संबंधों, अन्तःक्रियाओं तथा सुख सुविधाओं के आदान-प्रदान में किसी प्रकार की कठिनाई का अनुभव नहीं करते।
    वैश्वीकरण के संबंध में उपयुक्त तथ्यों को ध्यान में रखते हुए वैश्वीकरण को निम्न प्रकार समझाया जा सकता है, "वैश्वीकरण एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें हर समय और दूरी के सभी अवरोधों को समाप्त करके विष्णु के किसी भी स्थान में स्थित व्यक्तियों एवं समुदायों को राजनीतिक आर्थिक एवं सांस्कृतिक दृष्टि से भलीभांति अंतर संबंधित कर सकते हैं।"

    वैश्वीकरण में भौतिक विज्ञानों की भूमिका

    वैश्वीकरण आधुनिक समय की एक ऐसी वास्तविकता एवं आवश्यकता है जिसे प्रत्येक देश ने स्वीकार किया है। वैश्वीकरण के कार्यों में भौतिक विज्ञानों की मुख्य भूमिका रही है। भौतिक विज्ञानों की विकसित तकनीकी के कारण हुई प्रगति तथा नवीन खोजों में निम्नलिखित बिंदुओं का योगदान रहा है:-
    • भूमि, वायु तथा जल मार्गों के द्वारा यातायात अथवा आवागमन को अधिक से अधिक बेहतर बनाने से संबंधित परिवहन साधनों की खोज और विकास।
    • मुद्रित सामग्री का विकास तथा लिखित शाब्दिक सामग्री के माध्यम से संप्रेषण का प्रारंभ ।
    • रेडियो, टेलीविजन, टेलीफोन, संदेश प्रणाली, टेलीग्राफ, टेलीप्रिंटर, वीडियो कैमरा, मोबाइल टेलीफोन, फोटोग्राफी एवं गतिशील चलचित्र, उपग्रह संचार प्रणाली सुविधाएं, टेली कॉन्फ्रेंसिंग आदि वैज्ञानिक खोजों के फलस्वरूप उपलब्ध प्रभावी संचार एवं संप्रेषण प्रणाली सभी भौतिक विज्ञान की ही देन है।
    भौतिक विज्ञान में होने वाले अन्वेषण एवं नवीन खोजों के परिणाम स्वरूप विभिन्न प्रकार की संप्रेषण प्रणाली संचार प्रणाली तथा आवागमन के साधनों के द्वारा मानव जीवन में एक नई क्रांति आई है तथा आधुनिक मानव जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में सुविधाएं प्रदान करके मानव जीवन को खुशहाल तथा आरामदायक बनाया गया है। उन्नत संप्रेषण तथा संचार तकनीकी ने समय तथा दूरी के सभी अवरोध समाप्त कर दिए हैं।


    अतः विश्व के सभी देश एक दूसरे से प्रत्येक क्षेत्र जैसे व्यापार, संचार, यातायात, निर्यात, चिकित्सा, कृषि, पशुपालन आदि के संबंध में नवीन जानकारी प्राप्त कर सकते हैं तथा एक दूसरे की सहायता तथा सहयोग कर सकते हैं। आज विश्व के किसी भी कोने में रहने वाला व्यक्ति तथा समुदाय अपने आप को विश्व के अन्य व्यक्तियों तथा समुदायों से पूर्ण रूप से अंता संबंधित तथा आत्मनिर्भर हैं।

    यदि किसी देश में कोई घटना जैसे भूचाल आना बाढ़ आना, आतंकवाद, बम ब्लास्ट होना, राष्ट्रों में होने वाले आपसी अनबन का संबंध केवल एक अकेले देश तक सीमित नहीं रहता है बल्कि इसके विश्वव्यापी परिणाम होते हैं तथा सभी देशों को इसकी जानकारी हो जाती है।

    उपयुक्त वर्णित आधुनिक सुविधाओं में विश्व के सभी व्यक्तियों, समुदायों तथा राष्ट्रों को आपस में अन्तः संबंधित करके "वसुधैव कुटुंबकम" की अवधारणा को साकार किया है। यह सभी भौतिक विज्ञान के द्वारा ही संभव हुआ है।

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