हिंदी साहित्य का प्रथम महाकाव्य पृथ्वीराज रासो । चंदबरदाई । Hindi Ka Pratham Maha Kavya Prithiviraj Raso
हिंदी साहित्य का प्रथम महाकाव्य पृथ्वीराज रासो । चंदबरदाई । Hindi Ka Pratham Maha Kavya Prithiviraj Raso हिंदी साहित्य का प्रथम महाकाव्य पृथ्वीराज रासो : चंदबरदाई। पात्र परिचय एवं ऐतिहासिकता इस लेख के माध्यम से आप पृथ्वीराज रासो की ऐतिहासिकता की प्रामाणिकता को लेकर चल रहे हिंदी साहित्य में विवाद से परिचित हो पाएंगे।साथ ही इसमें चित्रित मुख्य पात्रों और इसके महत्वपूर्ण सर्ग 'कयमास वध' की अंतर्वस्तु से भी अवगत हो पाएंगे। पृथ्वीराज रासो का हिंदी साहित्य में महत्वपूर्ण स्थान है। यह आदिकाल का सर्वश्रेष्ठ ग्रंथ है। इसमें दिल्ली के अंतिम हिंदू सम्राट महाराज पृथ्वीराज चौहान के शौर्य और पराक्रमपूर्ण जीवन को चित्रित कर उनकी वीरता को प्रस्तुत किया गया है। पृथ्वीराजरासो को हिंदी साहित्य का प्रथम महाकाव्य और इसके लेखक चंदबरदाई को हिंदी साहित्य के प्रथम महाकवि के रूप में स्वीकार किया जाता है। मिश्र बंधुओं ने लिखा है-"हिंदी का वास्तविक प्रथम महाकवि चंदबरदाई को ही कहा जा सकता है।" शुक्ल जी के अनुसार चंदबरदाई, पृथ्वीराज चौहान का राजकवि ही नहीं...