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Hindi Kahani | Kanon mein Kangana | Saransh aur Samiksha | Kathanak | Patra Parichay | Samvaad | Deshkaal evam vatavaran | Bhasha Shaili aur Uddeshya

 हिंदी कहानी कानों में कंगना कहानीकार - राजा राधिकारमण प्रसाद सिंह प्रकाशन वर्ष - सन् 1913 हिंदी कहानी कानों में कंगना हिंदी कहानी कानों में कंगना  कानों में  कंगना  कहानी का सारांश  कानों में  कंगना  कहानी की कथावस्तु  कानों में  कंगना  कहानी की भाषा शैली  कानों में  कंगना  कहानी के पात्र परिचय  कानों में कंगना कहानी का उद्देश्य  कानों में कंगन कहानी का देशकाल और वातावरण  कानों में  कंगना  कहानी की समीक्षा  राजा राधिकारमण प्रसाद सिंह द्वारा रचित 'कानों में कंगना' (1913) हिंदी कहानी साहित्य की एक कालजयी और कलात्मक रचना है। यह कहानी अपनी अलंकृत भाषा और नैतिक मूल्यों के ह्रास की मार्मिक अभिव्यक्ति के लिए जानी जाती है। यह उस संक्रमण काल की रचना है जहाँ रीतिकालीन विलासिता और आधुनिक नैतिकता के बीच द्वंद्व दिखाई देता है। ​ ​ 1. कथानक • ​'कानों में कंगना' का कथानक भोग-विलास, नैतिक पतन और अंततः पश्चाताप की एक दुखद यात्रा है। कहानी का आरंभ अत्यंत रूमानी और प्राकृतिक परिवेश में होता है, जहाँ नायक कि...