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लॉरेंस कोहलबर्ग का नैतिक विकास का सिद्धांत (Lawrence Kohlberg's Theory of Moral Development)

लॉरेंस कोहलबर्ग का नैतिक विकास का सिद्धांत  (Lawrence Kohlberg's Theory of Moral Development) लॉरेंस कोहलबर्ग का नैतिक विकास की अवस्था का सिद्धांत  ​ प्रस्तावना (Introduction) ​बाल मनोविज्ञान (Child Psychology) और विकासात्मक मनोविज्ञान (Developmental Psychology) के क्षेत्र में जब भी मनुष्य के चरित्र और उसकी नैतिकता के विकास की बात आती है, तो सबसे प्रामाणिक और विस्तृत नाम लॉरेंस कोहलबर्ग (Lawrence Kohlberg) का आता है। कोहलबर्ग एक प्रसिद्ध अमेरिकी मनोवैज्ञानिक थे, जिन्होंने अपना पूरा जीवन इस बात पर शोध करने में लगा दिया कि इंसान यह कैसे तय करता है कि क्या सही है और क्या गलत। ​जीन पियाजे (Jean Piaget) के संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत से अत्यधिक प्रभावित होकर, कोहलबर्ग ने बच्चों के 'नैतिक निर्णयों' (Moral Judgments) के पीछे छिपे मानसिक तर्कों को समझने का प्रयास किया। उनका यह मानना था कि जैसे-जैसे बच्चे का संज्ञानात्मक या बौद्धिक विकास होता है, वैसे-वैसे उसकी नैतिकता (Morality) का भी विकास होता है। कोहलबर्ग का यह नैतिक विकास की अवस्था का सिद्धांत (Theory of Moral Developmen...

जीन पियाजे का संज्ञानात्मक विकास का सिद्धांत | Jean Piaget's Theory of Cognitive Development

जीन पियाजे का संज्ञानात्मक विकास का सिद्धांत  Jean Piaget's Theory of Cognitive Development जीन पियाजे का संज्ञानात्मक विकास का सिद्धांत Piaget Sangyanatmak Siddhant जीन पियाजे का संज्ञानात्मक विकास का सिद्धांत इंद्रिय जनित गामक अवस्था पूर्व संक्रियात्मक अवस्था मूर्त संक्रियात्मक अवस्था औपचारिक संक्रियात्मक अवस्था जीन पियाजे के संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत का शैक्षिक महत्व। ​ प्रस्तावना (Introduction) ​बाल मनोविज्ञान (Child Psychology) और शिक्षा शास्त्र (Pedagogy) के क्षेत्र में जब भी बच्चों के सीखने और उनके बौद्धिक विकास की बात आती है, तो सबसे पहला और सबसे प्रामाणिक नाम जीन पियाजे (Jean Piaget) का आता है। जीन पियाजे एक प्रसिद्ध स्विस मनोवैज्ञानिक (Swiss Psychologist) थे, जिन्हें विकासात्मक मनोविज्ञान (Developmental Psychology) का जनक भी माना जाता है। उनका संज्ञानात्मक विकास का सिद्धांत (Theory of Cognitive Development) यह स्पष्ट करता है कि बच्चों में बुद्धि (Intelligence) का विकास किस प्रकार होता है और वे दुनिया को कैसे समझते हैं। ​पियाजे का मानना था कि "बच्चे नन्हे व...

काव्य हेतु लक्षण एवं प्रयोजन Kavya Hetu Lakshan Evam Prayojan

                         इस पोस्ट के माध्यम से आप  काव्य-हेतु  क्या है ? भारतीय और पाश्चात्य काव्यशास्त्रियों ने कितनें काव्य हेतु मानें हैं ? और उनकी क्या परिभाषा दी है ? आदि प्रश्नों के उत्तर दे पाएंगे। काव्य हेतु लक्षण एवं प्रयोजन । शिक्षा विचार । Kavya Hetu Lakshan Evam Prayojan । Shiksha Vichar काव्य हेतु    विश्व में कोई भी ऐसा कार्य नहीं है जिसके पीछे कारण न हो अर्थात् कारण के बिना कार्य हो ही नहीं सकता। जब प्रत्येक वस्तु के उत्पादन में अवश्य ही कोई न कोई कारण होता है तो फिर साहित्य में कारण का अभाव क्यों ? साहित्य को जीवन की अभिव्यक्ति माना गया है। अतः जिस वस्तु का जीवन से इतना घनिष्ठ संबंध है। उसके आरंभ में कारण न हो यह असंभव है। काव्य अथवा साहित्य के कारणों को विभिन्न नामों से पुकारा गया है आज कारण के लिए हेतु शब्द का प्रयोग अधिक किया जाता है और अब यह रुढ़ भी हो चुका है। अतः हेतु का अभिप्राय उन साधनों से है जो कवि के काव्य रचना में सहायक होते हैं। काव्य-हेतु क्या है ?  इस विषय पर अनेक भारत...

IGNOU MA Hindi MHD 9 Assignment

IGNOU MA Hindi MHD 9 Assignment  MHD 9 Question Paper  IGNOU MA Hindi MHD 9 Assignment   खंड  क  निम्नलिखित में से किन्हीं चार प्रश्नों के उत्तर दीजिए  (क) कथा की लिखित परंपरा पर प्रकाश डालिए कथा की लिखित परंपरा एक महत्वपूर्ण साहित्य और सांस्कृतिक धरोहर है, जो समाज के इतिहास, मान्यताओं, और विचारधाराओं को संरक्षित और संप्रेषित करती है। लिखित कथाएं हमें प्राचीन समाजों के जीवन और उनकी समस्याओं के बारे में जानकारी देती है, साथ ही उनके धार्मिक, सांस्कृतिक और नैतिक मूल्यों का परिचय कराती है। प्रारंभिक दौर  कथा की लिखित परंपरा का प्रारंभ बहुत पुराने समय से माना जाता है, जब लोग अपने अनुभवों और कहानियों को पथरों, ताम्रपत्रों और पांडुलिपियों पर लिखते थे। वैदिक काल में, ऋग्वेद, यजुर्वेद और अथर्ववेद जैसी धार्मिक ग्रंथो में अनेक कथाएं मिलती हैं, जो समाज की धार्मिक और नैतिक संरचना को दर्शाती हैं। इन ग्रंथो में अनेक कथाएं मंत्रों और के रूप में प्रस्तुत की गई है जो उसे समय की सामाजिक संरचना धार्मिक आस्था और नैतिक मान्यताओं का दर्पण है। रामायण और महाभारत  राम...