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बहु इंद्रिय अनुदेशन का अर्थ व परिभाषा Bahu indriya anudeshan ka Arth aur paribhasha


बहु इंद्रिय अनुदेशन का अर्थ

  • 'बहु इंद्रिय' अनुदेशन शिक्षा में नया प्रत्यय है, इसका विकास एडगर्डेल ने किया। यह इसकी शब्दावली से ही प्रकट होता है कि वह अनुदेशन जिसमें दो से अधिक इंद्रियां क्रियाशील हो, अनुबंधन शिक्षण का ही एक प्रारूप है। शिक्षण में भी अनुदेशन निहित होता है। शिक्षक की क्रिया अनुदेशन से आरंभ होती है। अनुदेशन से ज्ञान के उद्देश्य की प्राप्ति की जाती है।
  • अनुदेशन की परिभाषा:- अनुदेशन से सीखने की परिस्थितियों उत्पन्न की जाती हैं जिससे छात्र अनुभव करते हैं और उनके व्यवहार में परिवर्तन लाया जाता है। "अनुदेशन क्रिया तथा भाव की एक प्रणाली है जिससे अधिगम होता है" यदि अधिगम को समझ लिया जाए तब अनुदेशन अधिक स्पष्ट हो जाता है ।
  • क्रियाओं तथा अनुभवों से जो व्यवहार परिवर्तन होता है उसे अधिगम कहते हैं। यदि व्यवहार परिवर्तन संवेगों, अभिप्रेरणा या परिपक्वता से होता है तो उसे अधिगम नहीं कहते हैं।
  • अनुदेशन का लक्ष्य अधिगम परिस्थितियों उत्पन्न करना है जिससे छात्रों को कुछ करना हो तथा कुछ अनुभव हो जिसका परिणाम अधिगम होता है। एडगार्डेल ने आंतरिक अनुभव का उपयोग बहूइंद्रिय अनुदेशन के संदर्भ में किया है। इसके अंतर्गत इन्होंने इंद्रियों को महत्व दिया।
  • छात्रों को अनुभव इंद्रियों के माध्यम से होता है। आंखों से देखना, कानों से सुनना तथा मानसिक स्तर पर व्यवस्था करना प्रत्यक्षीकरण कहलाता है। छात्र जिन बातों को सुनता है तथा निरीक्षण करता है तथा उनकी मानसिक स्तर पर अपने ढंग से व्यवस्था करता है उसे अनुभव कहते हैं।


बहु इंद्रिय शिक्षण के विभिन्न प्रकार 

बहुइंद्रिय अनुदेशन में अनुभव के लिए दो से अधिक इंद्रियां क्रियाशील होती हैं। इंद्रियां अनुभवो का स्रोत है। मानसिक स्तर पर सूचना इंद्रियों द्वारा पहुंचती है। इन सूचनाओं की व्यवस्था को अनुभव कहते हैं। इंद्रिय अनुदेशन को क्रियाशीलता के आधार पर तीन वर्गों में विभाजित करते हैं:-

  • १ एकल इंद्रिय अनुदेशन 
  • २ द्वि इंद्रिय अनुदेशन
  • ३ बहु इंद्रिय अनुदेशन

  • एकल इंद्रिय अनुदेशन - इस प्रकार के अनुदेशन के प्रस्तुतीकरण या प्रवचन में छात्र कानों से सुनता है या चित्रण में देखता है। प्राकृतिक दृश्य का निरीक्षण करता है जिसमें आंखें अधिक क्रियाशील रहती हैं। सुनने या देखने से छात्रों को नए अनुभव होते हैं जिसे अधिगम कहते हैं। एकल इंद्रिय अनुदेशन से ज्ञान- उद्देश्य की प्राप्ति होती है। अपने अनुभवों का प्रत्यय स्नान कर सकता है या पहचान सकता है शैक्षिक रेडियो द्वारा एकल इंद्रिय अनुदेशन का उपयोग किया जाता है।

  • द्वि इंद्रिय अनुदेशन साधारणतः कक्षा शिक्षण में द्वि इंद्रिय अनुदेशन का उपयोग किया जाता है। शिक्षक अपने प्रस्तुतीकरण में बोलता है, लिखता है, प्रदर्शन करता है, मानचित्र, चार्ट ,मॉडल आदि की सहायता लेता है। छात्र देखते हैं और सुनते हैं इस प्रकार दृश्य - श्रव्य दोनों इंद्रियां क्रियाशील रहती हैं। एकल से द्वि इंद्रिय अनुदेशन अधिक प्रभावशाली तथा रुचिकर होता है। इस प्रकार के अनुभव से ज्ञान के उद्देश्य की प्राप्ति होती है। शैक्षिक दूरदर्शन द्वारा द्विइंद्री अनुदेशन को प्रयुक्त किया जाता है जिसमें देखते हैं तथा सुनते हैं। इसीलिए रेडियो की अपेक्षा दूरदर्शन अधिक उपयोगी व रुचिकर होता है।

  • बहु इंद्रिय अनुदेशन :-  छात्रों को अनुभव प्रदान करने के लिए दो से अधिक इंद्रियों को सम्मिलित किया जाता है। देखने व सुनने के साथ उन्हें करने या प्रत्यक्षिकरण का अवसर दिया जाए तब छात्र अधिक बोधगम्य कर सकेंगे। उदाहरण के लिए ताजमहल के संबंध में बताये जाने के स्थान पर यदि उसका चित्र या मॉडल दिखाया जाए तब छात्र को ताजमहल का अच्छा ज्ञान होगा और  यदि छात्रों को आगरा ले जाकर ताजमहल दिखा दिया जाए तब वास्तव में ताजमहल का असली बोध हो सकेगा।

चिंतन स्तर पर इंद्रियों से परे एक अनुभव को सम्मिलित किया जाता है जिसमें छात्रों को सृजनात्मक कार्य करने होते हैं। पाठ्यवस्तु पर छात्र का मौलिक चिंतन भी होता है जो इंद्रियों से परे होता है।


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