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Hindi Kahani Kafan | Munshi Premchand ki kahani Kafan | Hindi kahani Kafan ka Saransh tatha Samiksha

 हिंदी कहानी - कफन
कहानीकार - मुंशी प्रेमचंद
प्रकाशन वर्ष - सन् 1936


हिंदी कहानी कफन 

  • हिंदी कहानी कफन 
  • हिंदी कहानी कफन का सारांश 
  • मुंशी प्रेमचंद की कहानी कफन की कथावस्तु 
  • हिंदी कहानी कफन पात्र परिचय 
  • हिंदी कहानी कफन देश काल और वातावरण 
  • हिंदी कहानी कफन की समीक्षा 
  • हिंदी कहानी कफन का संवाद 
  • हिंदी कहानी कफन का उद्देश्य 


मुंशी प्रेमचंद की अंतिम और सबसे महत्वपूर्ण कहानी 'कफन' (1936) हिंदी साहित्य की एक युगांतकारी रचना है। यह कहानी न केवल प्रेमचंद के 'आदर्शोन्मुख यथार्थवाद' से 'नग्न यथार्थवाद' की ओर संक्रमण का प्रतीक है, बल्कि यह सामंती समाज और गरीबी के उस वीभत्स रूप को उजागर करती है जहाँ मानवीय संवेदनाएँ दम तोड़ देती हैं।

1. कथानक
• ​'कफन' का कथानक अत्यंत संक्षिप्त होते हुए भी गहरा प्रभाव छोड़ता है। कहानी की शुरुआत एक झोपड़ी के बाहर अलाव तापते पिता घीसू और पुत्र माधव से होती है, जबकि भीतर माधव की पत्नी बुधिया प्रसव-वेदना से तड़प रही है। दोनों इस डर से अंदर नहीं जाते कि उनके जाने पर दूसरा व्यक्ति बचे हुए उबले आलू अधिक खा लेगा। अंततः बुधिया मर जाती है।


• अगले दिन दोनों गाँव के जमींदार और अन्य लोगों से कफन के नाम पर चंदा इकट्ठा करते हैं और पाँच रुपये जुटा लेते हैं। लेकिन बाजार पहुँचते ही उनकी नियति बदल जाती है। वे सोचते हैं कि 'कफन तो लाश के साथ जल ही जाएगा, इससे किसी का क्या भला होगा?'

• वे कफन खरीदने के बजाय मधुशाला (कलारी) जाते हैं और उन पैसों से भरपेट तली हुई मछलियाँ, पूरियाँ और शराब पीते हैं। नशे की हालत में वे बुधिया की सद्गति की दुआएँ देते हैं और नाचते-गाते हुए वहीं गिर पड़ते हैं।

• यह कथानक गरीबी के उस चरम बिंदु को दर्शाता है जहाँ व्यक्ति की नैतिक चेतना मर जाती है और केवल 'पेट की आग' ही सत्य रह जाती है। यह कहानी व्यवस्था की क्रूरता और मनुष्य के जड़ हो जाने की दास्तान है, जिसे प्रेमचंद ने बड़ी निर्भीकता से चित्रित किया है।



2. पात्र एवं चरित्र चित्रण

1. घीसू का चरित्र चित्रण
​घीसू कहानी का सबसे प्रमुख और जटिल पात्र है। वह साठ वर्ष का एक वृद्ध है जो जीवन के थपेड़ों और निरंतर दरिद्रता के कारण पूरी तरह संवेदनहीन और जड़ हो चुका है।

• ​अत्यधिक आलसी और कामचोर: घीसू की सबसे बड़ी विशेषता उसका आलस है। वह बीस दिन काम करता है तो अगले दस दिन आराम करने की सोचता है। समाज उसे 'कामचोर' कहता है, लेकिन वह इसे अपनी स्वाधीनता समझता है।

• ​दार्शनिक और तर्कशील: घीसू केवल अनपढ़ ग्रामीण नहीं है, वह परिस्थितियों से उपजा एक 'दरिद्र दार्शनिक' है। जब माधव बुधिया की मृत्यु पर दुखी होता है, तो घीसू उसे सांत्वना देते हुए कहता है कि वह भाग्यवान थी जो इस माया-जाल से मुक्त हो गई। उसके पास हर अनैतिक कार्य के लिए एक तर्क मौजूद है।

• ​परजीवी प्रवृत्ति: घीसू का चरित्र दिखाता है कि कैसे शोषक समाज ने उसे एक परजीवी बना दिया है। वह जानता है कि किसान और जमींदार उसे गाली देंगे, लेकिन अंत में उसे कुछ न कुछ दे ही देंगे। उसकी यह प्रवृत्ति समाज की विफलता का प्रमाण है।

• ​संवेदना का अंत: अपनी बहू की मृत्यु पर कफन के पैसों से शराब और पूरियाँ खाना उसके चरित्र के उस भयानक पक्ष को दिखाता है जहाँ 'भूख' ने 'नैतिकता' को पूरी तरह निगल लिया है।



2. माधव का चरित्र चित्रण
​माधव घीसू का बेटा है और वह अपने पिता के नक्शेकदम पर चलते हुए उससे भी दो कदम आगे निकल गया है। वह युवा पीढ़ी की उस मानसिकता का प्रतिनिधित्व करता है जो अभावों के कारण दिशाहीन हो चुकी है।

• ​क्रूर और संवेदनहीन: माधव का अपनी पत्नी बुधिया के प्रति व्यवहार अत्यंत क्रूर है। जब वह प्रसव पीड़ा से तड़प रही होती है, तब माधव अंदर जाकर उसकी मदद करने के बजाय इस डर से बाहर बैठा रहता है कि कहीं घीसू अकेले सारे आलू न खा जाए।

• ​व्यक्तित्वविहीन: माधव का अपना कोई स्वतंत्र व्यक्तित्व नहीं है। वह पूरी तरह अपने पिता घीसू के प्रभाव में है। घीसू जो तर्क देता है, माधव उसे ही सत्य मान लेता है। वह घीसू का ही एक 'क्रूर संस्करण' है।

• ​स्वार्थी और पेटू: माधव के लिए दुनिया का सबसे बड़ा सुख 'भोजन' है। बुधिया की मृत्यु के बाद जब उसे चंदे के पैसे मिलते हैं, तो वह पिता के साथ मिलकर शराबखाने में जिस तरह पकवानों का आनंद लेता है, वह उसकी चरम स्वार्थपरता को उजागर करता है। उसके मन में एक पल के लिए अपराधबोध आता है, पर वह क्षणिक होता है।



3. बुधिया का चरित्र चित्रण
​बुधिया इस कहानी की एकमात्र सकारात्मक लेकिन सबसे त्रस्त पात्र है। वह कहानी के केंद्र में है, फिर भी वह पूरी कहानी में केवल 'चीखती' और 'तड़पती' ही दिखाई देती है।


• ​परिश्रमी और गृहणी: बुधिया ने इस घर में आने के बाद घीसू और माधव के उजाड़ जीवन में कुछ व्यवस्था लाने की कोशिश की थी। वह चक्की पीसकर या घास छीलकर उन दोनों आलसियों के लिए दो वक्त की रोटी का इंतजाम करती थी।

• ​त्याग की प्रतिमूर्ति: उसने जीते जी उन दोनों को खिलाया और मरने के बाद भी अपने कफन के पैसों से उन्हें जीवन की सबसे बड़ी 'दावत' दे गई। बुधिया का चरित्र भारतीय ग्रामीण नारी की उस स्थिति को दर्शाता है जहाँ वह अथक परिश्रम के बाद भी उपेक्षा और अकाल मृत्यु का शिकार होती है।

• ​मूक वेदना की प्रतीक: पूरी कहानी में बुधिया का कोई संवाद नहीं है। वह केवल अपनी पीड़ा से व्यवस्था को चुनौती देती है। उसकी मृत्यु घीसू और माधव की अमानवीयता को नापने का पैमाना बन जाती है।



3. संवाद
• ​कहानी के संवाद छोटे, चुटीले और पात्रों की मानसिकता को पूरी तरह उघाड़ने वाले हैं। प्रेमचंद ने संवादों के माध्यम से समाज की विडंबनाओं पर तीखा प्रहार किया है। जैसे जब घीसू कहता है— "मरी तो भाग्यवान थी, जो इतनी जल्दी माया-मोह के बंधन तोड़ दिए।"

• यह संवाद केवल सहानुभूति नहीं, बल्कि एक गहरा व्यंग्य है। मधुशाला में कफन के पैसों का उपयोग करते समय उनके बीच का वार्तालाप— "हमारी आत्मा प्रसन्न हो रही है, तो क्या उसे (बुधिया को) पुण्य न होगा?"—मनुष्य की उस तर्कबुद्धि को दिखाता है जो अपने पापों को पुण्य का जामा पहनाने की कोशिश करती है।

• ये संवाद कथानक को गति देते हैं और पाठकों को सोचने पर विवश करते हैं कि दोष पात्रों का है या उस आर्थिक व्यवस्था का जिसने उन्हें ऐसा बना दिया।



4. देशकाल एवं वातावरण
• ​प्रेमचंद ने इस कहानी में भारतीय ग्रामीण अंचल की उस भयानक दरिद्रता का चित्रण किया है, जो मनुष्य को पशु से भी बदतर बना देती है। वातावरण में एक प्रकार की 'शून्य जड़ता' और 'अंधकार' व्याप्त है।

• झोपड़ी के बाहर जलता हुआ अलाव और अंदर बुधिया की चीखें एक भयावह दृश्य उत्पन्न करती हैं। यह वातावरण केवल एक परिवार का नहीं, बल्कि तत्कालीन शोषक समाज का प्रतीक है जहाँ एक ओर बेगार और शोषण है, तो दूसरी ओर भुखमरी।

• बाजार और मधुशाला का वातावरण अंत में घीसू और माधव की 'क्षणभंगुर खुशी' को दिखाता है, जो वास्तव में उनके दुखों का एक दुखद अंत है।



5. भाषा शैली
• ​इस कहानी की भाषा सरल, प्रवाहपूर्ण और उर्दू मिश्रित 'हिंदुस्तानी' है, जो प्रेमचंद की विशेषता है। इसमें मुहावरों का सटीक प्रयोग किया गया है। शैली वर्णनात्मक होने के साथ-साथ 'व्यंग्यात्मक' है। लेखक ने कहीं भी अपनी तरफ से उपदेश नहीं दिया है, बल्कि घटनाओं के माध्यम से पाठक को झकझोरा है।

• भाषा में यथार्थ की नग्नता है, जहाँ शब्दों के माध्यम से गरीबी की सड़ांध को महसूस किया जा सकता है। प्रेमचंद ने यहाँ अलंकारों के बजाय 'तथ्यों' की भाषा का प्रयोग किया है, जो इसे एक आधुनिक और मनोवैज्ञानिक कहानी बनाता है।



6. उद्देश्य
• ​'कफन' का मुख्य उद्देश्य समाज की उस आर्थिक विषमता और खोखली नैतिकता को बेनकाब करना है, जहाँ इंसान की बुनियादी जरूरतें (रोटी) धर्म और संस्कृति के पाखंड से बड़ी हो जाती हैं।

• प्रेमचंद दिखाना चाहते हैं कि गरीबी केवल अभाव नहीं है, बल्कि वह मनुष्य की संवेदनाओं और संबंधों का कत्ल भी करती है। यह कहानी व्यवस्था पर सवाल खड़ा करती है कि— क्यों एक मेहनतकश किसान  इलाज के बिना मर जाती है और क्यों समाज केवल मुर्दों पर कपड़ा चढ़ाने को ही धर्म समझता है?
• अंततः यह कहानी 'पूँजीवादी जड़ता' और 'सामंती क्रूरता' के विरुद्ध एक सशक्त साहित्यिक दस्तावेज है।



निष्कर्ष,
• 'कफन' हिंदी कहानी के इतिहास में एक मील का पत्थर है, जो अपनी यथार्थवादी दृष्टि और मनोवैज्ञानिक गहराई के कारण आज भी उतनी ही प्रासंगिक है जितनी 1936 में थी।


'कफन' कहानी: 50 महत्वपूर्ण प्रश्न-उत्तर

प्रश्न 1: 'कफन' कहानी का प्रकाशन वर्ष क्या है और यह सर्वप्रथम किस पत्रिका में छपी थी?
उत्तर: 'कफन' कहानी का प्रकाशन वर्ष 1936 है। यह सर्वप्रथम 'जामिया' पत्रिका के मार्च 1936 के अंक में प्रकाशित हुई थी।


प्रश्न 2: प्रेमचंद की कहानियों के विकास क्रम में 'कफन' को किस श्रेणी में रखा जाता है?
उत्तर: 'कफन' को प्रेमचंद की अंतिम महत्वपूर्ण कहानी माना जाता है। यह उनके 'आदर्शोन्मुख यथार्थवाद' से पूर्ण 'यथार्थवाद' की ओर संक्रमण का प्रतीक है।


प्रश्न 3: कहानी के मुख्य पात्रों के नाम और उनका आपसी संबंध क्या है?
उत्तर: कहानी में तीन मुख्य पात्र हैं: घीसू (पिता), माधव (पुत्र) और बुधिया (माधव की पत्नी)। घीसू और माधव चमार जाति के दरिद्र ग्रामीण हैं।


प्रश्न 4: कहानी की शुरुआत किस दृश्य से होती है?
उत्तर: कहानी की शुरुआत झोपड़ी के द्वार पर अलाव के सामने बैठे घीसू और माधव से होती है, जबकि अंदर बुधिया प्रसव-वेदना से तड़प रही है।


प्रश्न 5: घीसू और माधव झोपड़ी के अंदर बुधिया को देखने क्यों नहीं जाते?
उत्तर: दोनों इस डर से अंदर नहीं जाते कि उनके जाने पर दूसरा व्यक्ति अलाव में भुन रहे आलू अधिक खा लेगा। यह उनकी संवेदनहीनता और भूख की पराकाष्ठा है।


प्रश्न 6: घीसू की आयु कितनी बताई गई है और वह कितने वर्षों से विदुर (बिना पत्नी के) है?
उत्तर: कहानी में घीसू की आयु साठ वर्ष बताई गई है और वह लगभग बीस वर्षों से विदुर के रूप में जीवन व्यतीत कर रहा है।


प्रश्न 7: प्रेमचंद ने घीसू और माधव की कामचोरी का वर्णन किस प्रकार किया है?
उत्तर: लेखक के अनुसार, घीसू एक दिन काम करता तो तीन दिन आराम करता। माधव इतना आलसी था कि आधे घंटे काम करता तो एक घंटे चिलम पीता।


प्रश्न 8: बुधिया की मृत्यु का मुख्य कारण क्या था?
उत्तर: बुधिया की मृत्यु का कारण प्रसव-वेदना और उचित उपचार व देखरेख का अभाव था। वह पूरी रात तड़पती रही और दम तोड़ दिया।


प्रश्न 9: बुधिया के मरने पर घीसू और माधव की पहली चिंता क्या थी?
उत्तर: बुधिया के मरने पर उन्हें दुख से अधिक इस बात की चिंता थी कि अब कफन कहाँ से आएगा और घर में लकड़ी तक नहीं है।


प्रश्न 10: जमींदार ने घीसू को कफन के लिए कितने रुपये दिए थे?
उत्तर: घीसू के रोने-धोने और गिड़गिड़ाने पर जमींदार ने नफरत के साथ उसे दो रुपये निकाल कर दे दिए थे।


प्रश्न 11: कफन के लिए कुल कितनी राशि एकत्रित हुई थी?
उत्तर: जमींदार से दो रुपये मिलने के बाद, गाँव के अन्य बनियों और भले मानसों से कुल मिलाकर पाँच रुपये की राशि जमा हुई थी।


प्रश्न 12: घीसू और माधव कफन खरीदने बाजार जाते समय क्या चर्चा करते हैं?
उत्तर: वे चर्चा करते हैं कि कफन तो लाश के साथ जल जाएगा, इससे अच्छा होता कि ये पैसे जीवित अवस्था में किसी काम आते।


प्रश्न 13: घीसू के अनुसार, कफन की प्रथा के बारे में क्या विचार थे?
उत्तर: घीसू का मानना था कि यह कैसी बुरी प्रथा है कि जिसे जीते जी तन ढंकने को चीथड़ा न मिला, उसे मरने पर नया कफन चाहिए।


प्रश्न 14: घीसू और माधव ने अंततः कफन के पैसों का क्या किया?
उत्तर: उन्होंने कफन नहीं खरीदा और उन पैसों से शराबखाने (कलारी) जाकर शराब, तली हुई मछलियाँ, चटनी और पूरियाँ खरीदीं।


प्रश्न 15: शराबखाने में घीसू और माधव ने किसे दुआएँ दीं?
उत्तर: उन्होंने बुधिया को दुआएँ दीं कि उसी के कारण आज उन्हें ऐसा राजसी भोजन नसीब हुआ है और वही उन्हें बैकुंठ ले जाएगी।


प्रश्न 16: "हमारी आत्मा प्रसन्न हो रही है, तो क्या उसे पुण्य न होगा?" यह कथन किसका है?
उत्तर: यह कथन घीसू का है, जब वह शराब के नशे में माधव को सांत्वना दे रहा था कि उनकी तृप्ति से बुधिया की आत्मा को शांति मिलेगी।


प्रश्न 17: कहानी में 'आलू' किसका प्रतीक है?
उत्तर: आलू यहाँ सर्वहारा वर्ग की न्यूनतम आवश्यकता और उस आदिम भूख का प्रतीक है जो रिश्तों की संवेदना को भी समाप्त कर देती है।


प्रश्न 18: जमींदार घीसू से नफरत क्यों करता था?
उत्तर: क्योंकि घीसू बेहद कामचोर था और कई बार जमींदार के यहाँ से पैसे या अनाज लेकर काम पर नहीं पहुँचा था।


प्रश्न 19: माधव ने बुधिया के प्रति कृतज्ञता क्यों नहीं जताई?
उत्तर: माधव कहता है कि उसने घर में आकर उसे व्यवस्था दी और खिलाया, लेकिन अब वह मरकर उन्हें परेशान कर रही है। यह व्यवस्था की क्रूरता का चित्रण है।


प्रश्न 20: "भाग्यवान थी, जो इतनी जल्दी माया-मोह के बंधन तोड़ दिए।" यह वाक्य किसके लिए कहा गया है?
उत्तर: यह वाक्य घीसू ने बुधिया की मृत्यु पर माधव से कहा था, जो उसके दार्शनिक और जड़ हो चुके व्यक्तित्व को दर्शाता है।


प्रश्न 21: 'कफन' कहानी में समाज के किस वर्ग पर तीखा व्यंग्य किया गया है?
उत्तर: यह कहानी शोषक वर्ग (जमींदार) और उस व्यवस्था पर व्यंग्य है जो गरीब को काम के बदले सम्मानजनक मजदूरी नहीं देती।


प्रश्न 22: शराबखाने में घीसू ने बचे हुए भोजन का क्या किया?
उत्तर: घीसू ने बचे हुए भोजन (पूरियाँ) को पास बैठे एक भिखारी को दे दिया और पहली बार 'दाता' होने का गर्व महसूस किया।


प्रश्न 23: कहानी के अंत में घीसू और माधव की स्थिति क्या होती है?
उत्तर: वे नशे में धुत होकर नाचने-गाने लगते हैं और अंततः बेहोश होकर वहीं गिर पड़ते हैं।

प्रश्न 24: प्रेमचंद ने घीसू को 'किसानों की बस्ती' में क्या संज्ञा दी है?
उत्तर: लेखक ने घीसू को एक ऐसे व्यक्ति के रूप में चित्रित किया है जिसके पास किसानों जैसी सहनशीलता तो है, पर वह काम से जी चुराता है।

प्रश्न 25: घीसू को अपनी शादी के बीस साल पुराने भोज की याद क्यों आती है?
उत्तर: क्योंकि उस ठाकुर की बारात में उसने भरपेट पूरियाँ और मिठाइयाँ खाई थीं, वैसी तृप्ति उसे आज कफन के पैसों से मिल रही थी।

प्रश्न 26: बुधिया के चरित्र का सबसे महत्वपूर्ण पक्ष क्या है?
उत्तर: वह इस उजाड़ घर की एकमात्र परिश्रमी पात्र थी जिसने पीस-कूटकर उन दोनों आलसियों का पेट पालने की कोशिश की।

प्रश्न 27: कहानी का शीर्षक 'कफन' क्यों रखा गया है?
उत्तर: 'कफन' यहाँ केवल मृत शरीर को ढंकने वाला कपड़ा नहीं है, बल्कि यह मर चुकी मानवीय संवेदनाओं और सामाजिक व्यवस्था का प्रतीक है।


प्रश्न 28: क्या 'कफन' कहानी को प्रगतिवादी कहानी माना जा सकता है?
उत्तर: हाँ, क्योंकि यह वर्ग-संघर्ष को सीधे तौर पर नहीं, बल्कि आर्थिक अभाव के कारण चरित्र के पतन के माध्यम से दिखाती है।


प्रश्न 29: घीसू के अनुसार 'बैकुंठ' कौन जाएगा?
उत्तर: घीसू का मानना है कि बुधिया बैकुंठ जाएगी क्योंकि उसने उन भूखों को भरपेट भोजन कराया है, चाहे वह कफन के पैसों से ही क्यों न हो।


प्रश्न 30: कहानी में 'ठाकुर की बारात' का प्रसंग क्या दर्शाता है?
उत्तर: यह प्रसंग घीसू की मानसिक दरिद्रता और उसके जीवन के एकमात्र सुख 'भोजन' की महत्ता को दर्शाता है।


प्रश्न 31: "मरे तो मरे, कफन तो मिल ही जाता है।" यह सोच किस सामाजिक स्थिति को उजागर करती है?
उत्तर: यह दिखाती है कि समाज जीवित व्यक्ति की सहायता नहीं करता, लेकिन दिखावे के लिए मृत व्यक्ति पर खर्च करना धर्म समझता है।


प्रश्न 32: प्रेमचंद की इस कहानी की भाषा शैली कैसी है?
उत्तर: इसकी भाषा सरल हिंदुस्तानी (उर्दू-हिंदी मिश्रित) है, जिसमें व्यंग्य और प्रतीकात्मकता का गहरा पुट है।


प्रश्न 33: 'कफन' कहानी किस संकलन में संकलित है?
उत्तर: यह कहानी प्रेमचंद के अंतिम कथा संकलन 'कफन' (1936) में ही संकलित है।


प्रश्न 34: कहानी में घीसू का व्यक्तित्व कैसा है?
उत्तर: वह एक चतुर, अनुभवी और परिस्थितियों से समझौता कर चुका वृद्ध है जो नैतिकता की परवाह नहीं करता।


प्रश्न 35: क्या घीसू और माधव अपनी स्थिति के लिए स्वयं जिम्मेदार हैं?
उत्तर: आंशिक रूप से, लेकिन प्रेमचंद ने मुख्य रूप से उस शोषक व्यवस्था को जिम्मेदार माना है जो मेहनतकश को केवल दुःख देती है।

प्रश्न 36: कहानी का चरमोत्कर्ष क्या है?
उत्तर: शराबखाने में घीसू और माधव का नाचते-गाते हुए गिर पड़ना कहानी का सबसे प्रभावशाली मोड़ है।


प्रश्न 37: बुधिया की प्रसव-वेदना के समय माधव क्या कर रहा था?
उत्तर: माधव चूल्हे से गरम आलू निकालकर फूँक-फूँककर खा रहा था और पत्नी की चीखें अनसुनी कर रहा था।


प्रश्न 38: घीसू ने कफन न खरीदने के पीछे क्या तर्क दिया?
उत्तर: उसने तर्क दिया कि लाश के साथ कफन जल ही जाएगा, वह किसी के पेट में तो नहीं जाएगा।


प्रश्न 39: कहानी में 'कलारी' किसका प्रतीक है?
उत्तर: कलारी यहाँ उन वंचितों के लिए एक क्षणिक स्वर्ग का प्रतीक है जहाँ वे अपने जीवन के दुखों को भूल सकते हैं।

प्रश्न 40: "गरीबों की दुआ खाली नहीं जाती।" यहाँ कौन किसे दुआ दे रहा है?
उत्तर: घीसू और माधव उस भिखारी को पूरियाँ देते हुए यह बात कहते हैं, जो स्वयं कफन के पैसों पर पल रहे हैं।

प्रश्न 41: कहानी में वर्णित गाँव का वातावरण कैसा है?
उत्तर: गाँव का वातावरण सामंती है जहाँ निम्न वर्ग के पास बुनियादी सुविधाओं का घोर अभाव है।

प्रश्न 42: माधव को अपनी पत्नी की याद कब आती है?
उत्तर: जब वह शराब के नशे में चूर होता है, तब एक क्षण के लिए वह उसकी मृत्यु पर रोता है, पर अगले ही क्षण शराब में डूब जाता है।


प्रश्न 43: प्रेमचंद ने 'कफन' में किस दर्शन का प्रयोग किया है?
उत्तर: इसमें 'नग्न यथार्थवाद' का दर्शन है, जो मानवता के पतन की चरम सीमा को दिखाता है।


प्रश्न 44: घीसू और माधव के चरित्र में क्या कोई अंतर है?
उत्तर: घीसू अधिक अनुभवी और तार्किक है, जबकि माधव उसका केवल एक अंधानुकरण करने वाला पुत्र है।


प्रश्न 45: कहानी में जमींदार का चरित्र कैसा है?
उत्तर: जमींदार शोषक है, जो केवल दया के नाम पर थोड़े पैसे देकर अपनी सामाजिक जिम्मेदारी की इतिश्री कर लेता है।


प्रश्न 46: "बाप से भी बढ़कर है लड़का।" लेखक ने ऐसा क्यों कहा?
उत्तर: क्योंकि माधव, घीसू के आलस और संवेदनहीनता की विरासत को और अधिक गहराई से अपना चुका है।
प्रश्न 47: कहानी के अंत में 'कफन' का अर्थ क्या रह जाता है?
उत्तर: अंत में 'कफन' व्यवस्था की निर्लज्जता और इंसान की भूख का पर्याय बन जाता है।


प्रश्न 48: क्या 'कफन' प्रेमचंद की कहानियों के मूल स्वर से अलग है?
उत्तर: हाँ, क्योंकि उनकी अधिकांश कहानियाँ अंत में हृदय परिवर्तन या आदर्श की ओर मुड़ती हैं, जबकि 'कफन' का अंत अत्यंत कठोर यथार्थ के साथ होता है।


प्रश्न 49: घीसू के अनुसार, कफन के पैसे दोबारा कैसे मिलेंगे?
उत्तर: घीसू को विश्वास था कि लोग फिर से पैसे देंगे, क्योंकि समाज की नजरों में लाश को बिना कफन के नहीं छोड़ा जा सकता।

प्रश्न 50: 'कफन' कहानी का वैश्विक महत्व क्या है?
उत्तर: यह कहानी दुनिया भर की उन परिस्थितियों का चित्रण करती है जहाँ गरीबी मनुष्य की आत्मा को सुन्न कर देती है।




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